
राजसमंद. बढ़ती गर्मी ने लोगों को बेहाल कर दिया है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान में लगातार बढ़ोत्तरी से रात और दिन में गर्मी का प्रकोप बढ़ा है। तीखी धूप त्वचा को झुलसाने लगी है। गर्मी के चढ़ते तेवरों के चलते शीतल पेय पदार्थों की मांग में खासी बढ़ोत्तरी हुई है। पिछले करीब २० दिनों से अधिकतम तापमान ३७ डिग्री से लेकर ४४ डिग्री के करीब पहुंच चुका है। इस भीषण गर्मी में लोग काफी परेशान दिखते नजर आ रहे हैं। जहां पिछले सप्ताह की शुरुआत में अधिकतम तापमान ३६ डिग्री व न्यूनतम १२.६ डिग्री था। वहीं मंगलवार को अधिकतम तापमान ४३.१ हो तथा न्यूनतम २१ डिग्री रहा।
बदल गया लोगों का खान-पान
बढ़ती गर्मी ने लोगों का खानपान व दिनचर्या बदल दी है। गर्मी के चलते लोग ११ बजे के बाद बाहर निकलने से परहेज कर रहे हैं। जरूरी कार्य को सुबह जल्दी और शाम को करने में प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं खान-पान में भी खासा बदलाव देखने को मिल रहा है। घरों में छाछ-लस्सी, कैरी, व इमली पानी जैसे तरल पदार्थ को प्राथमिकता दी जा रही है। लू से बचाव के लिए घर में पुदीना, जीरा, काला नमक, गुड़ व शक्कर से बने कैरी व ईमली का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलाव छाछ, गन्ने का रस व नींबू पानी समेत अन्य पेय पदार्थों का सेवन बढ़ गया है। साथ ही गर्मी के फलों में तरबूज-खरबूजे की मांग घरों में बढ़ गई है। बाजारों में इन फलों की भरमार देखने को मिल रही है। इसके अलावा शहतूत, आम व अन्य फलों व सब्जियों की मांग बढ़ी है।
बदला पहनावा
तेज गर्मी में हल्के व ढीले कपड़े पहनना पसंद किया जा रहा है। गर्मी में पसीना सोख ले ऐसे कपड़े पहनकर लोग घरों से निकल रहे हैं। लोग लू के थपेड़ों से बचने के लिए पूरा तन ढक कर चल रहे हैं।
गर्मी का रौद्र रूप जारी
नाथद्वारा. शहर व उपखण्ड क्षेत्र में गर्मी का रौद्र रूप मंगलवार को भी जारी रहा। इस दौरान दोपहर के समय धूप व गर्म हवाओं के थपेड़ों के चलते बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। धूप व गर्म हवाओं से बचने के लिए महिलाओं और युवतियों के साथ पुरुष भी चेहरे को ढक कर ही घरों से बाहर निकले। गर्मी का असर शाम के समय कुछ कम हुआ, लेकिन हवाएं गर्म थी।
लू की लपटों ने कर दिया बेहाल
रेलमगरा(एस). कस्बे में सूर्य के रौद्र रूप के चलते मंगलवार को गर्मी से आम जनजीवन बेहद प्रभावित रहा। दोपहर की गर्मी के समय जरूरी काम से बाहर निकलने वालों के हाल खराब हो गए। प्रचण्ड गर्मी से बचाव को लेकर लोग ठंडे पेय पदार्थों से राहत का जतन करते देखे गए। वहीं, दोपहर के समय बिजली की आंख-मिचौली ने इस गर्मी में लोगों के लिए दुबले पर दो आषाढ़ वाली कहावत को चरितार्थ कर दिया। इसके चलते लोग पसीना-पसीना होते रहे। वहीं, गर्मी के बाहर निकलने वाले लोग चेहरे और हाथों को पूरी तरह से ढक कर ही बाहर निकले। हालांकि दिन के समय तो बाजारों व मुख्य मार्गों पर भी सन्नाटा पसरा रहा।
Published on:
02 May 2018 09:29 am
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