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Rajsamand News : कागजों में ही घूम रही घोषणाएं, कब लेंगी आकार नहीं कोई अता-पता !

राजसमंद जिले के लिए पिछले बजट में कई घोषणाएं की गई थी, लेकिन उसमें से एक भी योजना अभी तक धरातल पर नहीं उतरी है। कहीं पर जमीन फाइनल नहीं हो रही है तो कहीं पर बजट का टोटा पड़ा हुआ है।

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राजसमंद. राजस्थान सरकार की ओर से पिछले साल बजट में राजसमंद जिले के लिए कई घोषणाएं की गई। इन घोषणाओं से ऐसा लगा था कि जिले को विकास के पंख लगेंगे, लेकिन जिला प्रशासन की शिथिलता और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का नतीजा है कि अभी तक एक भी बड़ी घोषणा धरातल पर नहीं उतर पाई है। किसी के टेण्डर होने की बात कही जा रही है तो कोई बजट के अभाव में अटकी हुई है। कहीं पर जमीन तक चिन्हित नहीं हो पाई है। इसके कारण जनता भी अपने आप को ठगा सा महसूस कर रही है। घोषणाओं का अब तक धरातल पर नहीं उतरना समझ से परे है। पिछले साल की बजट घोषणाओं के जाने हाल।

22 साल से बेड़च का नाका की हो रही सिर्फ घोषणाएं

कुंभलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के चारभुजा तहसील क्षेत्र की बहुप्रतिक्षित बेड़च का नाका पेयजल परियोजना पिछले 22 साल से सिर्फ बजट घोषणाओं में ही घूम रही है। जानकारों की मानें तो तत्कालीन मुख्यमंत्री हीरालाल देवपुरा ने 15 सितंबर 2003 को इसका शिलान्यास किया। विधानसभा चुनाव होने के कारण 2003 में भाजपा के सुरेंद्रसिंह राठौड़ विधायक बने। उन्हें सिंचाई राज्यमंत्री बनाया गया। उन्होंने इसका फिर से शिलान्यास किया, लेकिन वन विभाग की जमीन होने के कारण काम अटक गया। 2008 से 2013 तक कांग्रेस सरकार आई। विधायक गणेश सिंह परमार एनओसी के लिए कागजात कंप्लीट करवाए और राज्य सरकार से इस परियोजना के लिए 14 करोड स्वीकृत भी करवाए। टेंडर भी जारी हो गया, निर्माण सामग्री भी परियोजना स्थल पर पहुंच गई। फिर सरकार बदल जाने से टेंडर निरस्त हो गया। 2018 से 2023 तक सुरेंद्र सिंह राठौड़ विधायक रहे, लेकिन प्रदेश में कांग्रेस की सरकार रही। इसके पश्चात विधानसभा चुनाव में विधायक सुरेन्द्र सिंह राठौड़ ने जीत दर्ज कर ऐलान किया कि जल्द बेड़च का नाका काम शुरू कराया जाएगा। पिछले साल बजट में बेड़च का नाका के लिए 60 करोड़ की घोषणा की गई, इसके आगे क्या हुआ इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। विभागीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। इसी प्रकार कुंभलगढ़ जोक का नाका एनीकट निर्माण के लिए 8 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे, लेकिन अभी तक काम भी प्रारंभ नहीं हो पाया है। वहीं 132 केवी जीएसएस कुंभलगढ़ जमीन आवंटन का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके अलावा शेष कार्य अभी भी प्रोसेसिंग में चलने की बात कही जा रही है।

टेण्डर में उलझा खारी फीडर

राजसमंद झील को भरने वाली खारी फीडर को चौड़ा करने के लिए पिछले साल बजट में 150 करोड़ की घोषणा की थी। इसके लिए सिंचाई विभाग की ओर से डीपीआर तैयार करवाकर टेण्डर आमंत्रित किए। टेण्डर में आठ फर्म ने भाग लिया, अभी उसकी जांच का कार्य चलने की बात कही जा रही है। इसका काम कब तक धरातल पर शुरू होगा इसका जवाब किसी के पास नहीं है। पिछली कांग्रेस सरकार ने भी खारी फीडर को चौड़ा करने के लिए के लिए प्रथम चरण में 80 करोड़ की घोषणा की थी। आनन-फानन में शिलान्यास भी कर दिया, लेकिन टेण्डर प्रक्रिया में सिर्फ एक फर्म के भाग लेने से मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद प्रदेश में भाजपा सरकार बनने पर नए सिरे से इसकी घोषणा की गई, जो अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाई है। इसी प्रकार जाखम बांध परियोजना में भी खास प्रगति नहीं दिख रही है।

बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय, बजट का टोटा

पिछली कांग्रेस सरकार ने जिला मुख्यालय पर घोषित बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय को नाथद्वारा शिफ्ट कर दिया था। इसे लेकर विधायक दीप्ति माहेश्वरी के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन किया था। विधानसभा चुनाव में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर फिर से बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय की घोषणा की गई। इसके लिए पद तक सृजित कर दिए, लेकिन अभी तक बजट नहीं आने के कारण मौके पर काम शुरू नहीं हो पाया है।

स्टोन मंडी की जमीन की तलाश जारी

पिछले बजट में राजसमंद में स्टोन मंडी की घोषणा की गई थी। लेकिन वर्तमान में स्थिति यह है कि अभी तक उसके लिए जमीन तक चिन्हित नहीं हो पाई है। ऐसे में जमीन का आवंटन करना, वहां पर जरूरत के अनुसार निर्माण आदि का काम कब शुरू होगा इसका किसी के पास जवाब नहीं है। ऐसे में उक्त घोषणा के अमलीजामा पहनना बहुत मुुश्किल दिखाई दे रहा है।

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