
राजसमंद. राज्य में सरकार द्वारा काला कानून वापस लेने की घोषणा को लेकर लोगों ने जोरदार प्रतिक्रियाएं दी हैं। लोगों ने खुशी जाहिर करते हुए इसे हठधर्मी शासन वृत्ति पर लोकतांत्रिक भावना की विजय बताया। प्रबुद्धजनों ने कहा कि जनता की आवाज को आखिर सरकार दबा नहीं सकी। इस आवाज को राजस्थान पत्रिका जैसे सच्चे लोकतांत्रिक प्रहरी ने मुखर बनाए रखा और मनमानी चल नहीं सकी। लोगों ने यह भी कहा कि सरकारों को ऐसी भूलें बहुत महंगी पड़ सकती हैं, जिन्हें दोहराया नहीं जाए, तो ही अच्छा है।
सकारात्मक पत्रकारिता...
&सशक्त और सकारात्मक पत्रिकारिता का परिणाम है। पत्रिका को भविष्य में भी ऐसी सतर्र्कता की जरूरत है।
डॉ. राकेश तैलंग, पूर्व जिला शिक्षाधिकारी
जनतम और प्रकाशन जरूरी..
&सरकार को ऐसे निर्णय लेने से पहले जनता की राय लेनी चाहिए। इसके बाद ही कोई भी निर्णय लिया लें। आगे भी सर्तकता जरूरी है।
बसंतीलाल बाबेल,
पूर्व न्यायाधीश
जनता के हित की लड़ाई...
&सरकार की इस जंग में पत्रिका ने विजय प्राप्त की। सरकार आगे भी ऐसे विधेयक नहीं लाए। सरकार दबाव में रहकर कोई कार्य न करे।
पंकज पालीवाल, युवा
निष्पक्ष निर्णय...
&पत्रिका की इस मुहिम ने लोगों की आवाज सरकार के समक्ष रखी। प्रदेश सरकार ने काला कानून वापस लेकर जनता को राहत प्रदान की है।
यशवन्त शर्मा
हितैषी मुद्दा उठाया..
&पत्रिका की यह मुहिम जनता की आवाज बनकर आई। पत्रिका के जनहित कार्य ने पत्रिका को जीत दिलवाई है। कुलदीप शर्मा, अध्यक्ष, श्रीलालन ग्रुप
दिखाया आइना
&पत्रिका ने काले कानून के खिलाफ लड़ाई लड़ सरकार को आईना दिखा दिया। यह विधेयक जनता के हित में नहीं था।
डॉ. रिचा
&जब तक काला तब तक ताला की मुहिम को सतत जारी रख जनता के पक्ष को अपने अखबार के माध्यम से सरकार को झुकने के लिये मजबूर किया, यह बड़ी जीत है। सरकारों को चाहिए कि देश में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की जो गरिमा एवं स्थान है उसके साथ किसी भी प्रकार का दबाव बनाने की नकारात्मक मानसिकता नहीं रखें। राजस्थान पत्रिका के गुलाबजी कोठारी की जनता के प्रति सोच को भी सम्मान देता हूंं , जिन्होनें जनता की आवाज को दबाने की मंशा वाले किसी भी वर्ग के आगे अपने को झुकने नहीं दिया।
ईश्वरसिंह सामोता,
अधिवक्ता, नाथद्वारा
नहीं चलता मनमर्जी का राज
&काले कानून को जनता के बीच रखकर राजनीति करना न तो देश हित में है एवं नहीं किसी भी सरकार के हित में हैं। राज्य सरकार ने लोकतंत्र के इस विश्वनीय एवं जनता के प्रति जवाबदेही को समझने वाले चौथे स्तंभ के साथ छेड़छाड़ करने की मंशा रखने वाली सरकारों को जनता आने वाले समय में करारा जवाब देगी। युवा पीढ़ी भी इस बारे में अपनी सोच के साथ सरकार की कार्यशैली का आकलन करने लगी है। वह समय अब नहीं रहा कि सरकार अपनी मनमर्जी कर जनता पर राज करे।
अजय गुर्जर, कांग्रेस सेवादल मुख्य संयोजक, नाथद्वारा
पत्रिका बधाई की पात्र
&सत्य परेशान हो सकता हैं पराजित नहीं, राजस्थान पत्रिका ने संपूर्ण भारत में अन्याय के विरुद्ध ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी। पत्रिका ने आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करते हुए जीत दर्ज की, जिसके लिए हार्दिक बधाई।
डॉ. लक्ष्मणसिंह रावत, पूर्व गृहराज्य मंत्री
लोकतंत्र को मिली शक्ति
&लोकतंत्र की व्यवस्था में भ्रष्टाचार चाहे सरकारी कर्मचारी करे या नेता उनको बचाने के लिए यदि सरकार काला कानून लाती है तो लोकतंत्र की व्यवस्था बिगड़ती है। पत्रिका के इस अभियान से लोकतंत्र को ओर अधिक शक्ति मिली है। अभियान द्वारा सरकार को कानून वापस लेना पड़ा, जनजागरण के लिए पत्रिका का धन्यवाद।
नारायण सिंह सोलंकी, उपाध्यक्ष, जिला कांग्रेस
लोकतंत्र व पत्रिका की जीत
&सरकार ने काला कानून वापस लेकर अपनी बची हुई ईज्जत की रक्षा की है। नहीं तो सरकार को इतना भुगतना पड़ता, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। यह लोकतंत्र एवं पत्रिका की जीत हैं ।
शांतिलाल जैन, वरिष्ठ अधिवक्ता देवगढ़
&लोकतंत्र के चौथे जिम्मेदार स्तम्भ पत्रिका की जनहित की लड़ाई सफल हुई। आज यह साबित हुआ कि लोकतंत्र में अगर सत्ता अपनी जिम्मेदारी से भटके तो मीडिया उसे सही राह दिखा सकता है। पत्रिका के प्रयास को अनंन्त अपार बधाई।
गिरिराज काबरा, युवा सामाजिक कार्यकर्ता, कुंवारिया
&पत्रिका ने जो सत्य की बात को लेकर अलख जगाई उसके आगे आखिर सरकार को झुकना ही पड़ा। पत्रिका ने सामाजिक सरोकार व समाज के प्रति अपने नैतिक दायित्व को निर्भिक होकर बखूबी निभाया। पत्रिका का प्रयास रंग लाया।
सीताराम अहीर,
युवा कार्यकर्ता,
कुरज
सबसे बड़ी जीत
&इस विवादित कानून के विरोध को लेकर पत्रिका के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने लेख के जरिए पुरजोर आवाज उठाई। पत्रिका समूह ने इस विवादित कानून को लेकर जब तक काला तब तक ताला अभियान भी चलाया, जिसका नतीजा सरकार को यह बिल वापस लेना पड़ा।
डॉ. वीपी सिंह काछबली
Published on:
20 Feb 2018 11:13 am
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