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तीन साल से टूटी पड़ी पुलियाएं, पानी फिर रोकेगा रास्ते

गत वर्ष भी हुई थी ऐसी लापरवाही और डुबोए थे लाखों

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तीन साल से टूटी पड़ी पुलियाएं, पानी फिर रोकेगा रास्ते

राजसमंद. जनता की गाढ़ी कमाई को सार्वजनिक निर्माण विभाग पानी में डुबोने को तैयार है। एक से लेकर तीन साल पहले तक टूटी पुलियाएं अभी तक बनकर तैयार नहीं हुईहैं। एक-दूसरे गांवों का आवागमन और सम्पर्क को टूटा ही, अधूरी पुलियाएं फिर से बरसाती पानी के बहाव का खतरा और झेलने की स्थिति में आ गईहैं। विभागीय अधिकारियों की इस लापरवाही पर सरकार का कोई भी नुमाइंदा गम्भीर नहीं है। बीते दिनों नई जिला कलक्टर ने आपदा प्रबंधन की बैठक में समीक्षा करते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग को विशेष तौर पर निर्देश दिए थे कि मानसून-सत्र से पहले क्षतिग्रस्त पुलियाएं, नाले व एनिकटों को दुरुस्त करें। जिले के आला अधिकारी के ये आदेश भी हवाई साबित हो रहे हैं। मानसून आने में सिर्फ १५ दिन बचे हैं और विभाग ने पुलियाओं का निर्माण कार्य अब शुरू किया है, जो कछुआचाल चल रहा है। सबसे बड़ी चिंता यह कि अतिवृष्टि होने की स्थिति में अधूरा निर्माण कार्य टूटकर बह सकता है। पिछले वर्ष अगस्त से लेकर अक्टूबर तक मानसून काल में कई पुलियों का निर्माण एवं मरम्मत कार्य शुरू किया था। उस दौरान तेज बारिश में अधूरा निर्माण बह गया था। लाखों रुपए पानी में बह गए थे। भाटोली पुलिया : मानसून आते ही याद आई दर्जनों गांवों को जोड़ते रेलमगरा-कांकरोली मार्ग पर बनास नदी पर भाटोली में बनी पुलिया वर्षों से मरम्मत के लिए तरस रही है। गत वर्ष बारिश में पुलिया पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। पुलिया कईजगह से खोखली हो गई थी। कई गावों केे लोगों ने ज्ञापन देकर पुलिया की मरम्मत की गुहार लगाईथी। विभागीय अधिकारियों ने टूटी पुलिया पर जानलेवा दीवारें खड़ी कर दी। राशि स्वीकृति और टेंडर होने के बावजूद विभाग ने कोई शुरू नहीं करवाया। मानसून की आहट देखते ही विभाग चेता है। कुम्हारियाखेड़ा काजवे पुल निर्माण एक साल बाद भी अधूरा पंचायत, ठेकेदार एवं सार्वजनिक निर्माण विभाग में तालमेल की कमी से कुम्हारिया खेड़ा में बनास नदी पर काजवे पुल निर्माण अधूरा पड़ा है, जो इस वर्ष भी पूरा होता नहीं दिख रहा। गत वर्ष निर्माण बारिश के वक्त शुरू किया गया। तेज बरसात में पुलिया के दोनों किनारे ढह गए। ठेकेदार द्वारा किया काम भी नदी में डूब गया। इससे ठेकेदार व विभाग को काफी नुकसान हुआ था। इस वर्ष पंचायत, विभाग और ठेकेदार की खींचतान के चलते काम नहीं हुआ। फिर पंचायत ने मनरेगा में निर्माण करवाया, लेकिन श्रमिक नहीं मिलने से काम रुक गया। अधूरा काम टूटकर फिर बर्बाद हो सकता है। नमाणा पुलिया की आस, सबसे बड़ी पिछले तीन वर्ष पूर्व बनास नदी के तेज बहाव में पुलिया क्षतिग्रस्त हो गया था। इस वर्ष निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। हालांकि कार्य पुरा होने की कगार पर है। लेकिन बीच में कोई रूकावट आने पर भारी परेशानी आ सकती है। कांकरोली के लिए भाटोली पुलिया का आगमन बंद होने के बाद लोगों के लिए एक मात्र यही पुलिया है, जिससे लोग आसानी से आ-जा सकते है। इससे दर्जनों गावों के लोग आस बांधे बैठे है कि जल्द काम पुरा हो जाए। छापरखेड़ी-तासोल पुलिया का मौत को बुलावा गोमती नदी पर बनी छापरखेड़ी-तासोल पुलिया लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुईहै। दरअसल, यह पुलिया तकनीकी रूप से गलत ढंग से बनी है, जिससे आसपास के इलाके में पानी भरने से फसलें डूब गईथीं। यही नहीं, पुलिया पर फिसलकर गिरे बाइक सवार दम्पती की डूबने से मौत हो गईथी। उस घटना को एक साल बीत चुकी है, लेकिन पुलिया ज्यों की त्यों है। गोमती नदी के उफान पर आने से छापरखेड़ी व तासोल का सम्पर्क कट जाता है। लोग विवशता में कईबार पुलिय पार करने का प्रयास करते हैं, तो बह जाते हैं। कईमवेशी जान गंवा चुके हैं। जांच करवा कार्रवाई करवाती हूं छापरखेड़ी-तासोल पुलिया का पूरा अवरोधक तो नहीं हटा सकते, लेकिन जो भी वैकल्पिक समाधान हो सकता है, उसके लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग को निर्देश दिए हैं। दूसरी पुलियाओं का भी पता करवाती हूं। श्रीमती आनंदी, कलक्टर