
राजसमंद. गरीब तबके के परिवारों के लिए अन्नपूर्णा रसोईघर योजना के तहत वेन से सप्लाई हो रहा नाश्ता और दो वक्त का भोजन गरीब तक नहीं पहुंच पा रहा है। नगरपरिषद की लापरवाही एवं जीवन सम्बल चेरिटेबल ट्रस्ट की उदासीनता के चलते रोटियों के पैकेट एनिकट में ही फेंक डाले। कुछ यही स्थिति लगभग हर अन्नपूर्णा रसोईघर के वेन की बनी हुई है। जानकारी के अनुसार राजसमंद शहर की अन्नपूर्णा रसोईघर योजना की एक वेन कुछ दिनों से मोही पंचायत के केरोट गांव में खड़ी रह रही है, जहां लोगों को नाश्ता व भोजन वितरित किया जा रहा है। वेन को आवंटित भोजन की खपत नहीं होने पर वेन संचालक द्वारा रोटियों को केरोट गांव के ही एनिकट में फेंक दी गई। सब्जियों के अलावा पैकेट भी एनिकट में बहा दिए। इससे राजसमंद व नाथद्वारा शहर की अन्य वेन संचालकों की भूमिका भी संदेह के दायरे में आ गई है।
जल्दी जाने के चक्कर में फेंक रहे रोटियां
ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद व गरीब तबके के लोगों को पोष्टिक नाश्ता व भोजन उपलब्ध कराने के लिहाज से जीवन सम्बल चेरिटेबल ट्रस्ट ने सभी वेन संचालकों को विशेष लक्ष्य दे दिया। जल्दी घर जाने या बचा खाना रिटर्न करने की होने वाली झंझट से बचने के लिए वेन संचालक अपने स्तर पर ही काफी तादाद में खाना इधर उधर निस्तारण कर घर चले जाते हैं। इस कारण जरूरतमंद लोगों का भोजन नाले, तालाबों या कचरे के ढेर में व्यर्थ जा रहा है। राजसमंद के अलावा अन्य जिलों से भी इस तरह की कई शिकायतें जीवन सम्बल चेरिटेबल ट्रस्ट कोटा के मुख्यालय पर पहुंची है।
पैसा निकाय का, सुविधा गांव में
अन्नपूर्णा रसोईघर योजना का स्वायत्त शासन विभाग जयपुर द्वारा जीवन सम्बल चेरिटेबल ट्रस्ट कोटा से विशेष अनुबंध हुआ है। इसके तहत रसोईघर वेन का भुगतान भी नगरीय निकाय द्वारा ही किया जा रहा है। तय लोकेशन पर वेन खड़ी करने और खाने की गुणवत्ता व अन्य मॉनिटरिंग को लेकर भी नगरीय निकाय के कार्मिक व अधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया है। इसका भुगतान भी नगरीय निकाय द्वारा ही किया जा रहा है। फिर भी इसका संचालन ग्रामीण क्षेत्र में किया जा रहा है। इससे भी सवाल उठ रहा है कि जब सुविधा शहरी क्षेत्र के लोगों के लिए है, तो रसोईघर योजना की वेन गांवों में क्यों जा रही है।
डीएलबी के निर्देश पर बदली जगह
राजसमंद में चार व नाथद्वारा में एक वेन से नाश्ता व भोजन की आपूर्ति की जा रही है। हाल ही स्वायत्त शासन विभाग के निर्देश व नगरपरिषद के नोडल अधिकारी द्वारा बताए अनुसार ही वेन की लोकेशन बदली गई है। इस तरह के कोई निर्देश नहीं है कि शहरी क्षेत्र में ही वेन रहे और गांव में नहीं जा सके। हमारा ध्येय ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभान्वित करना है।
गीतांजलि, प्रभारी जीवन सम्बल चेरिटेबल ट्रस्ट कोटा
पत्रिका की सूचना पर कार्रवाई
राजस्थान पत्रिका की सूचना पर केरोट एनिकट का निरीक्षण किया, जहां रोटियां पड़ी मिली। वेन संचालक से सफाई करते हुए सख्त भविष्य के लिए पाबंद किया कि वह कभी भी बचे भोजन को इस तरह से नहीं फेंके। कभी बच भी जाए, तो वापस रिटर्न वेन में भेजा जा सकता है।
जयप्रकाश, सुपरवाइजर अन्नपूर्णा रसोईघर योजना राजसमंद
Published on:
27 Dec 2017 10:53 am
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