
वन्यजीव सुरक्षा को लेकर सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास पर एहड़ा परंपरा भारी पड़ रही है। होली के दिन ग्रामीण समूह के रूप में जंगल से वन्यजीवों का शिकार कर खुलेआम दावतें कर रहे हैं। प्रशासन की उदासीनता के चलते आज भी गांवों में वन्यजीव शिकार की पुरातन परंपरा कायम है। हालांकि पिछले वर्षों में जो भी शिकायतें मिली, वे वन विभाग की जांच में सही नहीं पाई गई। इस पर विभाग द्वारा दावा किया जा रहा है कि राजसमंद जिले में ऐहड़ा प्रथा पर अंकुश लग गया है।
जानकारी के अनुसार भीम, देवगढ़, आमेट, कुंभलगढ़, राजसमंद एवं नाथद्वारा तहसील क्षेत्र के गांवों में होली के दिन ग्रामीण समूह के रूप में जंगल में शिकार के लिए निकल जाते हैं। बंदूक, तलवार, तीर के साथ विभिन्न हथियारों के साथ ग्रामीणों में खासकर युवावर्ग जंगल में संभावित क्षेत्र में घात लगाकर बैठते हैं। जंगल में परकोटा व चारदीवारी में बनी खिड़कियों में जाल बिछाकर लोग समूह के रूप में अलग- अलग तरह की आवाजे निकालकर वन्यजीवों को भडक़ाकर एवं डराकर भगाते हैं।
चारों दिशाओं में संभावित रास्तों पर पहले से घात लगाकर बैठे लोग वन्यजीव को या तो जाल से जीवित ही पकड़ लेते हैं अथवा गोली, पत्थर से मार गिराते हैं। जंगल से पकड़े जाने वाले वन्यजीवों से सामूहिक भोज तैयार कर लोग मौज करते हैं। शहरी क्षेत्र एवं रेलमगरा तहसील क्षेत्र के अलावा जिलेभर में सामूहिक रूप से वन्यजीवों का शिकार करने की परंपरा कायम है।
भीम- देवगढ़ संवेदनशील घोषित
एहड़ा को लेकर भीम- देवगढ़ तहसील संवेदनशील क्षेत्र है, जिसमें ताल, लसानी, सांगावास, विजयपुरा, कूंदवा, भीम के बग्गड़, बार, छापली, दिवेर पंचायत शामिल है। इसी आमेट के आगरिया, दोवड़ा, कुंभलगढ़ तहसील के अंटालिया, आंतरी, बनोकड़ा, झीलवाड़ा, गवार, कडिय़ा, खमनोर केसेमा, नेड़च, झालों की मदार, बिलोता, बड़ा भाणुजा तथा राजसमंद के सांगठकला, पिपलांत्री, केलवा, पड़ासली पंचायत क्षेत्र में ग्रामीण एहड़ा परंपरा में वन्यजीवों का शिकार करते हैं।
सात वर्ष के कारावास का प्रावधान
वन्यजीवों का शिकार करते पकड़े जाने वाले लोगों के खिलाफ वन्यजीव अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाती है। इसके तहत आरोपी को सात वर्ष के कठोर कारावास के साथ आर्थिक रूप से हर्जाना भरना पड़ता है।
यह है ऐहड़ा प्रथा
होली के दिन समूह के रूप में जंगल की सैर करते हुए वन्यजीवों का शिकार करना ही ऐहड़ा प्रथा है। तीतर, बटेर, खरगोश का अक्सर शिकार करते हैं और शाम को होली दहन के बाद जश्न मनाते हैं। भीम, देवगढ़, कुंभलगढ़ व राजसमंद तहसील क्षेत्र के कुछ गांवों में आज भी यह परंपरा प्रचलित है।
तीन साल में नहीं पुष्टि
ऐहड़ा परंपरा पर वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर विशेष फोर्स गठित कर दी। संवेदनशील क्षेत्र में नियमित गश्त की व्यवस्था रहेगी व अन्य जगह में क्षेत्रीय अधिकारी ध्यान रखेंगे। शिकार करते पकड़े जाने वाले को सात वर्ष के कारावास व अर्थदण्ड की सजा हो सकती है। तीन वर्षों में शिकायतें तो कई मिली, मगर विभागीय जांच में सही साबित नहीं हो सकी। इस कारण किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
कपिल चन्द्रावत, उपवन संरक्षक वन विभाग राजसमंद
Published on:
11 Mar 2017 06:52 pm
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