
केस 1 : संतोष कुमार (बदला हुआ नाम) मेरी बेटी इस वर्ष कक्षा ७ में है। स्कूल ने जो फीस चार्ट दिया है उसमें १६०० रुपए डबलपमेंट जार्च के लिए गए हैं। फीस के साथ ही स्कूल वाले इमारत के रखरखाव का खर्च भी हमसे वसूल रहे हैं। साथ ही स्कूल तो साढ़े दस माह ही खुलते हैं लेकिन स्कूल प्रशासन फीस १२ माह की वसूल करता हैं। छुट्टियों के दौरान केवल बस का किराया नहीं लिया जाता।
केस 2 : राजेंद्र कुमार (बदला हुआ नाम) मेरा बेटा इस वर्ष कक्षा पांच में एक निजी स्कूल में पढ़ता है। उस स्कूल की मासिक फीस २२०० रुपए है। स्कूल वालों ने अप्रेल में एक मुश्त ८८०० रुपए जमा करवाए हैं। अगली फीस मुझे जुलाई माह में जमा करनी है। मतलब फीस फरवरी, मार्च और अप्रेल की है। मई-जून में छुट्टी रहेंगी अगली फीस मुझे जुलाई में जमा करनी है। इस हिसाब से उन्हें ६६०० रुपए लेने थे लेकिन उन्होंने २२०० रुपए एडमिशन चार्ज जोडक़र लिया है।
राजसमंद. जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते निजी स्कूल पूरी तरह से मनमाना रवैया अपना रहे हैं। शिक्षा विभाग के तमाम सख्त निर्देशों को ताक पर रखकर अच्छी शिक्षा के नाम पर अभिभावकों से खुली वसूली करते हैं। कई स्कूल नियम विरुद्ध जाकर हर साल अभिभावकों से प्रवेश शुल्क लेते हैं, तो कई साढ़े १० माह की शिक्षा देकर १२ माह की फीस वसूलते हैं। जबकि नियमानुसार निजी स्कूल विद्यार्थी से केवल एक बार ही दाखिला फीस ले सकते हैं, अगर वह बच्चा दूसरे स्कूल में दाखिला लेता है, तो ही उससे फिरसे प्रवेश शुल्क लिया जा सकता है। जिले के अधिकांश निजी विद्यालय बच्चों से फीस के साथ दाखिले का भी चार्ज वसूलते हैं।
स्टाफ का ‘काट रहे पेट’
स्कूल प्रशासन विद्यार्थियों को साढ़े १० माह पढ़ाकर १२ माह की फीस वसूल रहा है। जबकि स्कूल में कार्यरत स्टाफ को वह साढ़े दस माह पढ़ाने का ही भुगतान करते हैं। इसमें से कुछ अनुदानित विद्यालय कुछ स्टाफ को ही १२ माह का भुगतान करते हैं।
इजात किया नया तरीका
कुछ स्कूल संचालकों ने दाखिला फीस लेने का अलग से तरीका इजात किया है। वह फरवरी, मार्च और अप्रेल की मासिक फीस के साथ ही एक माह की फीस दाखिले के रूप में लेते हैं। वहीं कुछ स्कूल तो प्रतिवर्ष सीधे तौर पर दाखिले के नाम से ही फीस वसूल रहे हैं।
अतिरिक्त कक्षा के नाम पर ट्यूशन
जिले के कई स्कूल संचालक बच्चों को स्कूल के बाद ट्यूशन पढ़ाते हैं। जिसकी फीस वह अतिरिक्त कक्षा के नाम से वसूलते हैं। अगर कोई बच्चा स्कूल में कोचिंग नहीं पढ़ता तो परीक्षा के दौरान उसे कम नम्बर देने की धमकी तक देते हैं। ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों को मजबूरन स्कूल द्वारा थोपी गई ट्यूशन पढ़वाते हैं।
मैं पता करता हूं...
अगर कोई विद्यालय नियमों की पालना नहीं कर रहे हैं तो उनपर सख्त कार्रवाई की जाएगी। निजी स्कूलों से जानकारी ली जाएगी।
युगल बिहारी दाधीच, जिलाशिक्षाधिकारी (अतिरिक्त चार्ज, माध्यमिक), राजसमंद
Published on:
11 Apr 2018, 8:38 AM IST
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