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बाल विवाह की पीड़ा देखकर महिलाओं को सशक्त करने की ठानी

महिला दिवस विशेषअबतक 3 हजार महिलाओं को बना चुकी हैं आत्म निर्भर

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बाल विवाह की पीड़ा देखकर महिलाओं को सशक्त करने की ठानी

प्रमोद भटनागर/मोहित माहेश्वरी
देवगढ़ (राजसमंद). 'मंजिलें उन्हें मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती हैÓ। नगर की भावना पालीवाल ने इन पंक्तियों को ठीक से समझा, मजबूत हौसले से उन्होंने पहले खुद का कॅरियर संवारा और अब वह अन्य महिलाओं की कामयाबी का जरिया बन रही हैं।
आमेट में जन्मी भावना पालीवाल का ससुराल देवगढ़ है। उनके मन में बचपन से ही बालविवाह के प्रति विरोध पनपने लगा था। जब वह छोटी थीं और बालविवाह की स्थिति देखती थीं, तो मन मसोस कर रह जाता था। तभी उनके मन में यह भावना हुई अगर महिलाओं को सशक्त बनाया जाए तभी इस अभिशाप से उन्हें मुक्ति मिल सकती है। ऐसे में उन्होंने पहले महिलाओं को सशक्त बनाने वाले सभी गुण सीखे और अब वह उन गुणों को महिलाओं को सिखाकर उन्हें आत्म निर्भर बना रही हैं। अबतक उन्होंने करीब ३ हजार महिलाओं को फैशन डिजाइन, सिलाई, कढ़ाई, महेंदी, पार्लर, डांस, कम्प्यूटर सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है। यह सब प्रशिक्षण वह निशुल्क देती हैं।
जुड़े और भी लोग
साल 2017 में कुछ सदस्यों के सहयोग से सामाजिक कार्यों की नींव रखी और सरकारी, गैर सरकारी माध्यम से महिलाओं निशुल्क प्रशिक्षण देने का काम कर रही हैं। महिलाओं को कुशल बनाने के साथ ही वह सामाजिक बुराइयों के खिलाफ भी उन्हें जागरूक करती हैं। भावना कहती हैं कि सामाजिक बुराइयों को खत्म करने के लिए लोगों को जागरूक होना होगा। इनके खिलाफ कानून इतना कारगर नहीं, जितना जनता की सहभागिता हो सकता है। वह महिलाओं को अपनी बेटे-बेटियों की शादी सही उम्र में करने की प्रेरणा भी देती हैं।
संस्थाओं द्वारा हो चुका है सम्मान
अलवर में महिला सशक्तिकरण के लिए डिजिटल सहेली सम्मान, उपखंड प्रशासन देवगढ़ द्वारा राजस्थान दिवस सम्मान, महिला दिवस पर देव जागरण संस्थान देवगढ़ द्वारा सम्मान, भारतीय हिन्दू सेना द्वारा राष्ट्रीय अलंकरण से सम्मानित हो चुकी हैं।