
सपा के राष्ट्रीय सचिव आजम खान अपनी पत्नी डॉ. तजीन फातिमा और बेटा अब्दुल्ला आजम के साथ।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव आजम खान पर 83 मुकदमे दर्ज हैं। उनके छोटे बेटे पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम पर 41 और आजम खान की पत्नी पर 34 मुकदमे हैं। ये शुरू हुआ 2017 के विधानसभा चुनाव से, जब आजम के दिखाए गलत रास्ते पर अब्दुल्ला आजम चले। ये रास्ता था, उम्र नहीं होते हुए भी अब्दुल्ला का चुनाव लड़ना। यही वो फैसला था, जिसका खामियाजा पूरा परिवार भुगत रहा है।
दो बार अब्दुल्ला आजम की गई विधायकी
2017 में आजम खान ने बेटे अब्दुल्ला का फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट बनवाकर चुनाव लड़वाया। कम्र उम्र होने की वजह से अब्दुल्ला आजम की विधायकी चली गई। 2022 में अब्दुल्ला फिर विधायक बने। अब्दुल्ला ने 2008 में छजलैट में पिता आजम के साथ धरने पर बैठकर सड़क जाम की थी। इसमें आजम खान और अब्दुल्ला आजम को 2-2 साल की सजा हुई। इसकी वजह से फिर अब्दुल्ला की विधायकी चली गई।
आइए अब आपको पूरा घटनाक्रम बताते हैं…
2017 में अब्दुल्ला आजम पहली बार लड़े थे चुनाव
2017 में हुए यूपी विधानसभा चुनाव में सपा नेता आजम खां ने अपने छोटे बेटे अब्दुल्ला आजम को पॉलिटिक्स में लॉन्च किया। अब्दुल्ला आजम खां को स्वार विधानसभा क्षेत्र से सपा का टिकट दिलाया। अब्दुल्ला चुनाव जीत गए। अब्दुल्ला आजम को 1 लाख 6 हजार 4 सौ 43 वोट मिले। दूसरे नंबर पर भाजपा के प्रत्याशी लक्ष्मी सैनी थे। लक्ष्मी सैनी को 53 हजार 3 सौ 47 वोट मिले थे।
3 जनवरी को आकाश सक्सेना ने दर्ज कराया था मुकदमा
3 जनवरी 2019 में बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने गंज पुलिस थाने में अब्दुल्ला के खिलाफ केस दर्ज कराया था। इसमें आरोप लगाया था कि उनके पास दो अलग-अलग बर्थ डेट वाले सर्टिफिकेट हैं। अप्रैल में पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी।
चार्जशीट के मुताबिक, “एक सर्टिफिकेट में अब्दुल्ला की बर्थडेट 1 जनवरी 1993 दर्ज है। ये सर्टिफिकेट रामपुर नगर पालिका ने जारी किया था। दूसरे सर्टिफिकेट में उनकी बर्थ डेट 30 सितंबर 1990 दर्ज है। उनका जन्म स्थान लखनऊ बताया गया है।
16 दिसंबर, 2019 को हाईकोर्ट ने विधानसभा सदस्यता खत्म की
कम उम्र के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2019 को अब्दुल्ला आजम की सदस्यता को अवैध घोषित कर दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अब्दुल्ला आजम सुप्रीम कोर्ट गए। सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर 2022 को अपना फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
अब्दुल्ला आजम की बर्थ सर्टिफिकेट का मुकदमा फैसले के करीब है। यह मामला रामपुर की स्पेशल MP-MLA कोर्ट में चल रहा है। इसमें अभियोजन पक्ष यानी शिकायतकर्ता की ओर से गवाही भी पूरी हो गई।
28 फरवरी हो होगी अगली सुनवाई
बुधवार यानी 16 फरवरी 2023 की सुनवाई थी, जिसमें आजम खान कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। एपीओ अमरनाथ तिवारी और भाजपा नेता के अधिवक्ता संदीप सक्सेना ने बताया कि कोर्ट में अब्दुल्ला के दो जन्म प्रमाण पत्र और दो पैन कार्ड मामलों में आरोपी आजम खां, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम और उनकी पत्नी तजीन फातिमा कोर्ट नहीं पहुंची। उनकी ओर से हाजिरी माफी की दरख्वास्त लगाई गई थी। एपीओ के मुताबिक इस मामले की अगली सुनवाई 28 फरवरी को होगी।
2022 में दूसरी बार विधायक बने अब्दुल्ला आजम, फिर चली गई विधायकी
2022 में सपा के टिकट पर स्वार से अब्दुल्ला आजम ने दोबारा चुनाव लड़ा। उन्होंने दूसरी बार 61 हजार से ज्यादा वोटो से अपना दल एस के प्रत्याशी हैदर अली को हराया। अब्दुल्ला आजम को 1 लाख 26 हजार 162 वोट मिले। हैदर अली को 65 हजार 59 ही वोट मिले। इस बार 11 महीने में ही उनकी विधायकी चली गई। वजह यह रही कि उन्हें 13 फरवरी को मुरादाबाद की MP-MLA कोर्ट ने एक मामले में दो साल की सजा सुनाई।
अब्दुल्ला आजम को क्यों हुई 2 साल की सजा
साल 2008: आजम खान और अब्दुल्ला आजम मुजफ्फरनगर के सपा नेता अमीर आलम खां के घर जा रहे थे। पुलिस मुरादाबाद के छजलैट में आजम की कार रुकवाकर तलाशी लेने लगी। पुलिस को जूती की नोक पर रखने के बयान देने वाले आजम खान हर्ट हो गए।
बेटे अब्दुल्ला आजम समेत उसी जगह पर धरने पर बैठ गए। इसकी जानकारी होते ही आसपास जिलों से भी सपा कार्यकर्ता पहुंच गए और हंगामा किया।
मामले में छजलैट के तब के थाना प्रभारी आसिफ अली ने 9 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया था। मुरादाबाद MP-MLA कोर्ट में इस केस की सुनवाई चल रही थी। इसमें कोर्ट ने आजम खान और विधायक बेटे अब्दुल्ला आजम को सजा सुनाई है।
Published on:
17 Feb 2023 06:36 pm
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