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जौहर यूनिवर्सिटी की 38 बिल्डिंगों पर संकट, ध्वस्तीकरण नोटिस के खिलाफ विरोध हुआ मुखर

Jauhar University Demolition Row Rampur : अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को जारी विध्वंस नोटिस का विरोध करते हुए इसे पक्षपातपूर्ण और अन्यायपूर्ण कार्रवाई बताया है। बोर्ड ने उत्तर प्रदेश सरकार से नोटिस वापस लेने, ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने और कानूनी व तकनीकी मुद्दों का समाधान बातचीत व विधिक प्रक्रिया के जरिए करने की मांग की है।
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रामपुर

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Harshul Mehra

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Updated: 17 Jul 2026, 8:42 PM IST

jamaat e islami hind seeks stay on jauhar university demolition governor rampur

जौहर यूनिवर्सिटी। (फोटो सोर्स: .jauharuniversity.edu.in)

Jauhar University Demolition Row: अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) द्वारा मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को लेकर जारी किए गए विध्वंस नोटिस पर कड़ी आपत्ति जताई है। बोर्ड ने इस कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण, दुर्भावनापूर्ण और अन्यायपूर्ण बताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से नोटिस को तत्काल वापस लेने और प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।

बोर्ड का कहना है कि इस मामले का समाधान विध्वंस जैसी कठोर कार्रवाई के बजाय कानूनी प्रक्रिया और संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए।

'यह सिर्फ विश्वविद्यालय नहीं, शिक्षा के खिलाफ कार्रवाई'

AIMPLB के प्रवक्ता डॉ. एसक्यूआर इलियास ने जारी बयान में कहा कि यह मामला केवल एक शिक्षण संस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि मुस्लिम समुदाय की शैक्षिक प्रगति से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां सरकारें लंबे समय से मुसलमानों के शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकीं, वहीं समाज के सहयोग और वर्षों की मेहनत से स्थापित शिक्षण संस्थानों को प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए निशाना बनाया जा रहा है।

'कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा'

डॉ. इलियास ने दावा किया कि जौहर विश्वविद्यालय के खिलाफ की जा रही कार्रवाई पूर्व मंत्री आजम खान के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध की भावना को दर्शाती है। उनका कहना था कि इस तरह के कदम न केवल एक व्यक्ति या संस्थान को प्रभावित करते हैं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में समुदाय की भागीदारी और विकास की संभावनाओं को भी कमजोर करते हैं।

RDA के दावों पर भी उठाए सवाल

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने रामपुर विकास प्राधिकरण के उस दावे को भी खारिज किया, जिसमें कहा गया है कि विश्वविद्यालय की 40 इमारतों में से 38 का निर्माण आवश्यक स्वीकृतियों के बिना किया गया। बोर्ड के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि संबंधित इमारतों का निर्माण उस समय हुआ था, जब यह क्षेत्र रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में शामिल नहीं था। ऐसे में उस समय RDA से भवन मानचित्र या निर्माण स्वीकृति लेना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं था।

'तकनीकी कमियां हों तो कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाए'

डॉ. इलियास ने कहा कि यदि निर्माण से जुड़े किसी प्रकार के तकनीकी या कानूनी मुद्दे हैं, तो उनका समाधान निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्षों की मेहनत, जनसहयोग और बड़े निवेश से तैयार हुए एक विश्वविद्यालय की 38 इमारतों को ध्वस्त करने जैसी कार्रवाई न केवल असंगत है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के लिए भी नुकसानदेह साबित हो सकती है।

'देश की शैक्षिक संपत्ति को होगा नुकसान'

बोर्ड का कहना है कि अगर विश्वविद्यालय की इमारतों को गिराया जाता है तो इसका असर केवल एक संस्थान या किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं रहेगा। उनके अनुसार, इस प्रकार की कार्रवाई देश की शैक्षिक संपत्तियों को अपूरणीय क्षति पहुंचाएगी और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नकारात्मक संदेश देगी।

सरकार और RDA से फैसले पर पुनर्विचार की अपील

अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने उत्तर प्रदेश सरकार और रामपुर विकास प्राधिकरण से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। बोर्ड ने मांग की है कि विध्वंस नोटिस तत्काल वापस लिया जाए, निर्माण से जुड़े कानूनी या तकनीकी विवादों का समाधान बातचीत और विधिक प्रक्रिया के जरिए किया जाए तथा जौहर विश्वविद्यालय जैसे शिक्षण संस्थान के संरक्षण और संचालन को सुनिश्चित किया जाए।