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Supreme Court Contempt: सुप्रीम कोर्ट की ‘लक्ष्मण रेखा’ पार कर रही योगी सरकार? जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर एक्शन के खिलाफ गरजे चंद्रशेखर आजाद

Jauhar University Bulldozer Action: रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी पर फिर मंडराया योगी सरकार का बुलडोजर, लेकिन इस बार सियासी और कानूनी जंग बेहद तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट की हालिया सख्त टिप्पणियों के बीच नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इस कार्रवाई को लेकर सीधे मुख्यमंत्री पर 'सांप्रदायिक राजनीति' का आरोप मढ़ दिया है।
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जौहर यूनिवर्सिटी। (फोटो सोर्स: .jauharuniversity.edu.in)

Jauhar University Demolition: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बुलडोजर को लेकर घमासान छिड़ गया है। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट 'मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी' पर रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) द्वारा 38 इमारतों को गिराने के आदेश के बाद सियासत का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस प्रस्तावित कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए भीम आर्मी के प्रमुख और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है। आजाद ने साफ कहा है कि अगर अदालत के अंतिम फैसले से पहले प्रशासन ने बुलडोजर चलाया, तो यह सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) होगी।

प्रशासनिक आदेश कभी अदालत का फैसला नहीं हो सकता

सांसद चंद्रशेखर आजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, "जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ बुलडोजर एक्शन का आदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सांप्रदायिक राजनीति की पराकाष्ठा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि बुलडोजर कार्रवाई पर माननीय सुप्रीम कोर्ट की बार-बार फटकार के बाद भी उत्तर प्रदेश सरकार अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है।

आजाद ने तर्क दिया कि रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा दिया गया आदेश महज एक प्रसासनिक फैसला है, कोई न्यायिक निर्णय नहीं। यूनिवर्सिटी प्रशासन को इस आदेश के खिलाफ सक्षम न्यायालय में जाने और अपने सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने मांग की कि जब तक अदालत का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक इस कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाई जाए।

नियमों के दोहरे मापदंड पर उठाए सवाल

चंद्रशेखर आजाद ने उत्तर प्रदेश सरकार पर पक्षपात और चुनिंदा कार्रवाई (Selective Action) का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची का हवाला देते हुए कहा कि अलीगढ़, प्रयागराज, गौतम बुद्ध नगर और लखनऊ जैसे जिलों में कई फर्जी संस्थान चल रहे हैं, जिन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। लेकिन दूसरी तरफ, एक पूरी तरह स्थापित और मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय को जानबूझकर बुलडोजर से निशाना बनाया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को ढहाने का नोटिस जारी किया है। प्रशासन का दावा है कि इन इमारतों का निर्माण बिना स्वीकृत मानचित्र (Approved Building Plans) के अवैध रूप से किया गया है।

साल 2006 में मुलायम सिंह यादव सरकार के दौरान एक विशेष अधिनियम के जरिए स्थापित हुई यह यूनिवर्सिटी शुरुआत से ही आजम खान का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट रही है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में यह परिसर जमीन पर अवैध कब्जे, पट्टे (Lease) के नियमों के उल्लंघन और किसानों की जमीन हड़पने जैसे दर्जनों कानूनी मुकदमों में घिर चुका है।

यूपी सरकार पहले ही कैंपस के एक बड़े हिस्से को अपने नियंत्रण में ले चुकी है। इसी साल कानूनी मुकदमों के दबाव के बीच आजम खान और उनके परिवार ने विश्वविद्यालय के संचालन ट्रस्ट (मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट) के आधिकारिक पदों से इस्तीफा दे दिया था।