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सपा नेता आजम खान ने राम मंदिर पर छिड़े रार की इस भीषण धर्म युद्ध से की तुलना

भाजपा और आरएसएस से पूछा कौन है इस महाभारत का कौरव और कौन पांडव

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Azam khan

सपा नेता आजम खान ने राम मंदिर पर छिड़े रार की इस भीषण धर्म युद्ध से की तुलना

रामपुर. देशभर में संघ परिवार और सरकार के मंत्री तक राममंदिर बनाने के लिए बयानों के तीर छोड़ रहे हैं। ऐसे में भला सपा नेता आजम खान कैसे चुप रह सकते हैं। संघ और भाजपा नेताओं की बयानबाजी के बाद राम मंदिर पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए आज़म खान ने कड़ी प्रतिक्रया दी है। उन्हें सख्त लहजे में यह बात संघ परिवार से की है कि वह जो चाहें करें, लेकिन दूसरे धर्मों के लोगों का ख्याल रखें। उनके लिए कोई दिक्कत पैदा न करें। इसके आगे आज़म खान ने बोलते हुए कहा कि अयोध्या के राम मंदिर मामले में नए महाभारत जैसे हालात छिड़े हैं। लिहाजा, एरएसएस और भाजपा को यह बताना होगा कि इस महाभारत का कौरव कौन हैं और पांडव कौन हैं। उन्होंने कहा कि यह मुसलमान तो नहीं बताएंगे, यह तो आरएसएस और भाजपा को ही तेय करना हैं। राममंदिर की चाहत रखने वालों को ही तय करना है।भाजपा को तय करना है कि आखिर इस रास्ते का असली रोड़ा कौंन हैं। इसके बाद अपने सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि इस रास्ते का रोड़ा कोई है तो आरएसएस है और भाजपा है। कानून मानने वालों के लिए अदालत है। उन्होंने कहा कि अगर अदालत में संज्ञान लिया जाता है तो उससे मेरा निवेदन है कि इस संग्राम में मुसलमानों का नाम शामिल नहीं करें। कौरव और पांडवों के युद्ध के फैसले को तय करना बहुसंख्यकों का ही काम है, न कि अल्पसंख्यकों का।

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वहीं, श्री राम का स्टेचू बनाने के सवाल पर आज़म खान ने कहा कि अगर मेरे पास फैसला लेने का हक होता और राम की मूर्ति बननी होती तो मैं चुनाव के इतने करीब यह फैसला नहीं लेता। वैसे भी इस देश में बहुसंख्यकों के भगवन हैं तो बने, लेकिन किसी बेगुनाह के सिर पर न बने। किसी बेगुनाह की लाश से उसकी शुरआत न हो। किसी बेहुनाह के लहू से उसका गारा न तैयार हो। ऐसा न हो कि किसी मुसलमान के फ्रिज से गोश्त निकालकर मार डालें।

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वहीं, संघ पिरवार के नेताओं और साधु संतों के सम्मेलनों को लेकर आज़म खान ने कहा कि यह देश आजाद है। यहां पर बोलने की आजादी है, सोचने की आजादी है, विचारों की आजादी है। यह अलग बात है कि मुसलमानों को इस आजादी से दूर रखा गया गया है। बस इसमें साधू सन्तों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इसमें दूसरे धर्मों के लोगों का अनादर ना हो।