
904 खाली पदों को भरने की आस | Image Source - Freepik
UP inter college 904 teacher vacancies: सुप्रीम कोर्ट द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने के निर्देश दिए जाने के बाद रामपुर जिले के इंटर और हायर सेकेंडरी कॉलेजों में भी नियुक्तियों को लेकर नई उम्मीद जगी है।
भले ही यह आदेश सीधे विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों पर लागू होता हो, लेकिन इसके प्रभाव से जिले के 81 राजकीय और सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में रिक्त पदों पर सरकार का ध्यान जाने की संभावना बढ़ गई है। छात्रों और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए यह फैसला एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
रामपुर जिले के हायर सेकेंडरी और इंटरमीडिएट कॉलेजों में प्रधानाचार्य, प्रवक्ता और सहायक अध्यापकों के कुल 904 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इतनी बड़ी संख्या में रिक्तियां होने के कारण छात्रों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है। कई कॉलेजों में विषय विशेषज्ञों की कमी के चलते नियमित कक्षाएं नहीं हो पा रही हैं, जिससे परीक्षा की तैयारी और शैक्षणिक गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो रही हैं।
शिक्षा विभाग की ओर से समय-समय पर इन रिक्त पदों का विवरण उच्चाधिकारियों को भेजा जाता रहा है। इसके बावजूद अब तक बड़े स्तर पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। अधिकारियों का कहना है कि वे लगातार प्रयास कर रहे हैं ताकि छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो, लेकिन स्थायी समाधान के लिए सरकार की ओर से ठोस कदम जरूरी हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि शासन स्तर पर इस दिशा में तेजी आएगी।
जिले में 29 राजकीय इंटर कॉलेज और 25 अनुदानित कॉलेज ऐसे हैं जहां प्रधानाचार्य के पद खाली हैं। हालांकि 10वीं तक के आठ राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य नियुक्त हैं, लेकिन 43 इंटरमीडिएट कॉलेजों में प्रवक्ताओं के 349 पदों में से केवल 39 पर ही शिक्षक कार्यरत हैं। यानी 310 पद अब भी रिक्त हैं, जो शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है।
सहायक अध्यापकों के कुल सृजित 502 पदों में से सिर्फ 126 अध्यापक ही कार्यरत हैं, जबकि 376 पद खाली हैं। यही स्थिति अनुदानित कॉलेजों की भी है, जहां प्रवक्ताओं के 53 पदों में से 18 और सहायक अध्यापकों के 337 पदों में से 159 रिक्त हैं। इस तरह पूरे जिले में प्रधानाचार्य, प्रवक्ता और सहायक अध्यापकों के कुल 904 पद खाली पड़े हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था पर लगातार दबाव बना हुआ है।
जिला विद्यालय निरीक्षक अंजलि अग्रवाल के अनुसार, हर सत्र की शुरुआत में रिक्त पदों की जानकारी एकत्र कर विभाग को भेजी जाती है। उनका कहना है कि पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए प्रधानाचार्यों को समय-समय पर आवश्यक निर्देश जारी किए जाते हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार इन रिक्तियों पर संज्ञान लेकर जल्द नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर सकती है, जिससे छात्रों को बेहतर शिक्षा और युवाओं को रोजगार का अवसर मिल सके।
Published on:
21 Jan 2026 04:25 pm
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