
रामपुर: अगले कुछ महीनों में सूबे की उन सभी विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं, जिनसे जीतेकर लोकसभा उम्मीदवार संसद पहुंच गए हैं। उनमें से सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण सीट रामपुर है। इस सीट से अभी तक लगातार 9 बार जीतने का रिकॉर्ड सपा के कद्दावर नेता आजम खान के पास है। लेकिन पिछले कुछ महीनों से सरकार की सख्ती ने उन्हें कहीं न कहीं तोड़ दिया है। जिसका असर उपचुनाव में देखने को मिल सकता है। वहीँ भाजपा भी अब इस सीट पर जीतकर आजम खान को चारों खाने चित करना चाह रही है। जिसके लिए उसे इस सीट पर जिताऊ उम्मीदवार की तलाश है। जिसमें पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता नवाब काजिम अली उर्फ नावेद मियां का नाम सबसे आगे है। उनके करीबी सूत्रों के मुताबिक भाजपा को आवेदन भेजा जा चुका है, लेकिन अभी हरी झंडी नहीं मिली है।
दोनों में कड़ी टक्कर
रामपुर उपचुनाव में नवाब काजिम अली खां भाजपा के लिए इसलिए भी मुफीद रहेंगे,क्यूंकि आजम खान और नवाब खान में अदावत किसी से छिपी नहीं है। पिछले काफी समय से नावेद मियां भी आजम और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम के खिलाफ गंभीर शिकायतें दर्ज करवा चुके हैं। जिसमें जांच चल रही है। फिर पिछले दिनों खुद गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नावेद मियां को धन्यवाद पत्र जारी करना भी इस बात पर मुहर लगा रहा है कि दोनों में कहीं कुछ पक रहा है।
भाजपा सरकारों की खुले मंच से कर रहे तारीफ
पत्रिका के साथ खास बातचीत में नावेद मियां ने सूबे की योगी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार की जमकर तारीफ भी की थी। जिसमें उन्होंने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का समर्थन किया था। लेकिन जब भाजपा में शामिल होने की बात पूछी गयी थी तो हंस कर टाल गए थे।
ये है वजह
अगर रामपुर के सियासी गणित की बात की जाए तो काजिम अली खां उर्फ़ नावेद मियां भाजपा के लिए फिट बैठते हैं। क्यूंकि इस सीट पर पचास फीसदी से ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं। फिर खुद नवाब खानदान के पास खुद का बड़ा वोट बैंक भी है। लिहाजा इन परिस्थितियों में वे ज्यादा फिट बैठते दिख रहे हैं। इसके अलावा आजम के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले भाजपा नेता आकाश सक्सेना भी दौड़ में हैं, लेकिन मुस्लिम मतदाताओं की वजह से वे रेस में पिछड़ सकते हैं ।
Published on:
17 Aug 2019 08:30 am
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