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दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर पेड़ से टकराई 92 मजदूरों से भरी बस, रामपुर हाईवे पर मची चीख-पुकार

Rampur Accident: दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे पर रविवार देर रात एक भीषण सड़क हादसा टल गया। लुधियाना से गोंडा जा रही 92 श्रमिकों से भरी एक अनियंत्रित डबल डेकर बस डिवाइडर फांदकर सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई।

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दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर पेड़ से टकराई 92 मजदूरों से भरी बस..

Rampur Bus Accident: उत्तर प्रदेश के दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे पर एक भीषण सड़क हादसा होते-होते टल गया। लुधियाना से उत्तर प्रदेश के गोंडा जा रही एक निजी डबल डेकर बस अचानक अनियंत्रित होकर डिवाइडर को पार करते हुए सड़क किनारे लगे एक विशाल पेड़ में जा घुसी। गनीमत यह रही कि बस में सवार सभी 92 श्रमिक इस हादसे में सुरक्षित बच गए।

तेज रफ्तार और अनियंत्रित बस का तांडव

हादसा उस समय हुआ जब पंजाब के लुधियाना में विभिन्न फैक्ट्रियों में काम करने वाले 92 श्रमिक एक निजी डबल डेकर बस बुक करके अपने घर गोंडा की ओर जा रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों और श्रमिकों के अनुसार, बस की रफ्तार काफी तेज थी। जैसे ही बस रामपुर जिले के ग्राम दुगनपुर के पास पहुंची, चालक ने अचानक वाहन पर से नियंत्रण खो दिया। बस पहले तेज धमाके के साथ डिवाइडर से टकराई और फिर लहराते हुए सीधे सड़क किनारे पेड़ में जा समाई।

मची चीख-पुकार

टक्कर इतनी जोरदार थी कि बस का अगला हिस्सा काफी क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के तुरंत बाद बस के भीतर अफरा-तफरी मच गई और गहरी नींद में सो रहे श्रमिक डर के मारे चिल्लाने लगे। शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण और दुगनपुर गांव के लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े। स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बस में फंसे हुए डरे-सहमे मजदूरों को एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकाला।

हादसे के बाद प्रशासन की मुस्तैदी

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने पुष्टि की कि इस बड़ी दुर्घटना में किसी भी श्रमिक को गंभीर चोट नहीं आई है। पुलिस की मौजूदगी में बस मालिक से संपर्क किया गया, जिसके बाद देर रात ही दूसरी बस का इंतजाम किया गया। सभी 92 श्रमिकों को दूसरी बस के जरिए उनके गंतव्य गोंडा के लिए रवाना कर दिया गया है।

सुरक्षा मानकों पर उठते गंभीर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर नेशनल हाईवे पर दौड़ने वाली निजी डबल डेकर बसों की सुरक्षा और चालकों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। अक्सर लंबी दूरी की इन बसों में क्षमता से अधिक सवारियां भरी जाती हैं और रात के समय थकान या नींद की झपकी बड़े हादसों का कारण बनती है। हालांकि इस बार किस्मत ने 92 परिवारों का चिराग बुझने से बचा लिया।