4 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

रामपुर के लाल की रूसी जंग में मौत: नरक बन गई थी जिंदगी, 9 महीने बाद तिरंगे के बजाय ताबूत में लौटा बेटा

Rampur News: रामपुर के 22 वर्षीय युवक शावेद की रूस में गोली लगने से मौत हो गई। बेहतर कमाई के लिए विदेश गया युवक मजबूरी में सेना में शामिल हुआ था। 9 महीने बाद उसका शव ताबूत में घर लौटा, जिससे परिवार और गांव में शोक का माहौल है।

2 min read
Google source verification
rampur youth death russia army case

रामपुर के लाल की रूसी जंग में मौत..

Youth Death Russia Army: रामपुर के मसवासी गांव के 22 वर्षीय शावेद की रूस में गोली लगने से मौत हो गई। शनिवार तड़के उसका शव दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा, जिसके बाद परिजन उसे लेने के लिए रवाना हो गए। जैसे ही यह खबर गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार और ग्रामीणों के बीच गहरा दुख और सन्नाटा पसरा हुआ है।

कमाई के लिए गया था विदेश

शावेद करीब 9 महीने पहले बेहतर कमाई की उम्मीद में रूस गया था। उसने घरवालों को बताया था कि वह वहां स्टील फर्नीचर का काम करेगा और शुरुआती दो महीनों तक उसने यही काम किया भी। लेकिन बाद में हालात ऐसे बने कि उसे मजबूरी में रूस की सेना में शामिल होना पड़ा। परिवार को इस बदलाव की पूरी जानकारी भी नहीं मिल पाई थी।

इकलौते सहारे की मौत

शावेद अपने परिवार का इकलौता सहारा था। वह इंटर पास था और घर की जिम्मेदारी संभाल रहा था। उसका छोटा भाई नावेद मानसिक रूप से अस्वस्थ है, जबकि बहन इंटर में पढ़ाई कर रही है। पिता दुल्हे हसन दूध का छोटा कारोबार कर किसी तरह परिवार चला रहे हैं। शावेद के विदेश जाने से परिवार को आर्थिक राहत की उम्मीद थी, लेकिन अब वह सपना हमेशा के लिए टूट गया।

आखिरी कॉल में झलक रहा था दर्द और डर

शावेद के फुफेरे भाई ने बताया कि 15 जून 2025 को वह रूस गया था। 1 से 5 सितंबर के बीच उसकी परिवार से बातचीत होती रही। 3 सितंबर को उसने आर्मी ड्रेस में अपनी फोटो भेजी थी। 5 सितंबर को हुई आखिरी बातचीत में उसकी आवाज में दर्द और डर साफ झलक रहा था। इसके बाद अचानक उसका संपर्क पूरी तरह टूट गया।

मौत की खबर महीनों बाद मिली

परिजनों के मुताबिक, शावेद की मौत 12 सितंबर 2025 को ही हो चुकी थी, लेकिन इसकी जानकारी परिवार को काफी देर से मिली। 2 अप्रैल 2026 को एक कॉल आया, जिसमें खुद को रूसी सेना का अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने उसकी मौत की सूचना दी। इससे पहले परिवार ने 6 जनवरी को सांसद के जरिए विदेश मंत्रालय को पत्र भेजकर मदद मांगी थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

सवालों के घेरे में पूरी घटना

इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर शावेद को किन परिस्थितियों में सेना में शामिल होना पड़ा और उसकी मौत की सूचना इतने लंबे समय तक क्यों नहीं दी गई। गांव के लोग इस दुखद घटना से सदमे में हैं और परिवार के साथ खड़े हैं। पूरे इलाके में गम और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।