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बीएयू को देश में सबसे बड़े आकार का काजू पैदा करने में मिली सफलता

रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) को देश में सबसेबड़े आकार का काजू पैदा करने में सफलता मिली है।

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cashew nuts

cashew nuts

(रवि सिन्‍हा की रिपोर्ट)
रांची। रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) को देश में सबसे बड़े आकार का काजू पैदा करने में सफलता मिली है। बीएयू के पूर्वीं सिंहभूम के दारीसा स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में काजू संबंधी अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना संचालित है। इसके अंतर्गत देश में सबसे बड़े आकार का काजूनट पैदा हो रहा है। हर नट का वजन 13 से 18 ग्राम है, जिसमें से 6 से 9 ग्राम तक काजू निकल रहा है। इस केन्द्र में पांच एकड़ क्षेत्र में काजू के कुल 756 पेड़ लगे हैं। वर्तमान फसल मौसम में अब तक लगभग 6 क्विंटल काजूनट प्राप्त हुए हैं। जून के अंतिम सप्ताह तक करीब 4 क्विंटल और काजूनट पैदा होगा।

काजू की 25 किस्‍में लगाईं

शोध परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. पवन कुमार झा ने बताया कि केन्द्र में कुल 25 किस्में लगाई हैं। उन्होंने बताया कि इस केंद्र में जिन 25 किस्मों के पेड़ हैं, उनमें कोंकण (महाराष्ट्र) की वेंगरुल्ला-4 किस्म, आंध्र की बपतला-8 किस्म और तमिलनाडु की वृन्दाचलम एवं प्रियंका किस्में झारखंड के लिए सर्वाधिक उपयुक्त हैं। उन्होंने दावा किया कि 13 से 18 ग्राम का काजूनट देश में और कहीं नहीं पैदा होता है। इनमें जनवरी में फूल लगते हैं। अप्रैल से फल पकने लगते हैं। पेड़ों से अप्रैल से जून माह तक फल मिलता रहता है। डॉ. झा ने बताया कि इसके पौधे सामान्यतः 5 मीटर की दूरी पर लगाए जाते हैं। एक हेक्टेयर क्षेत्र में इसप्रभेद का कुल 1,600 पौधे लगाए जा सकते हैं। पौधा लगाने के दूसरे वर्ष से इसमें प्रति हेक्टेयर लगभग 6 टन और पांचवें-छठे वर्ष से 15 से 16 टन काजू नट प्राप्त होने लगता हैं। एक बार पेड़ लगाने पर 25 से 30 वर्षों तक फल मिलता रहता है। जून तक पेड़ से फल लेने के तुरंत बाद जमीन से एक मीटर की ऊंचाई तक की डालियां काट देते हैं, ताकि अगले वर्ष बेहतर उत्पादन मिले।

प्रोसेसिंग प्लांट शीघ्र लगाया जाएगा

विवि के अनुसंधान निदेशक डॉ. डीएन सिंह ने बताया कि बीएयू के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र में काजू प्रोसेसिंग प्लांट शीघ्र लगाया जाएगा, ताकि नट से उच्च कोटि का खाने योग्य काजू निकालकर उसकी बिक्री की जा सके। काजू नट के एप्पल से जैम, जेली, फेनी आदि तैयार करने का भी संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इसके लिए संबंधित वैज्ञानिक डॉ झा से विस्तृत प्रस्ताव मांगा गया है। गौरतलब है कि झारखंड के पूर्वी सिंहभूम के अलावा सरायकेला-खरसावां और रांची के कई इलाकों में हाल के दिनों में काजू के पेड़ लगाने का काम शुरु हुआ। काजू की खेती से किसानों को अच्छी आमदनी हो रही है। काजू प्रोसेसिंग प्लांट के अभाव में अभी किसानों को पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। उपज को बेचने में दलाल किस्म के लोग लाभ का एक बड़ा हिस्सा खा जा रहे है। लेकिन प्रसंस्करण इकाई स्थापित हो जाने के बाद किसानों को समुचित लाभ मिल सकेगा।