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Dambha River: देसी इंजीनियरिंग का कमाल, नदी को किया जिंदा

Dambha River: झारखंड की राजधानी रांची से करीब 30 किलोमीटर दूर डेढ़ सौ लोगों की आबादी वाला पिछड़ा गुमनाम गांव आरा-केरम अपनी अथक संघर्ष की दास्तां के कारण रविवार को विश्व के मानचित्र पर अंकित हो गया।

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Dambha River

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Dambha River: रांची (रवि सिन्हा): झारखंड की राजधानी रांची ( Ranchi ) से करीब ३० किलोमीटर दूर डेढ़ सौ लोगों की आबादी वाला पिछड़ा गुमनाम गांव आरा-केरम ( Araa Keram ) अपनी अथक संघर्ष की दास्तां के कारण रविवार को विश्व के मानचित्र ( World Map ) पर अंकित हो गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ( PM Modi ) ने मन की बात ( Mann Ki Baat ) मेें इस गांव के अथक मेहनत के प्रयासों से पुनर्जीवित ( Revival ) हुई डंभा नदी का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि गांव के भोल-भाले ग्रामीणों ने अपने भागीरथी प्रयासों से वो कारनामा कर दिखाया, जिससे उनकी पानी की सारी मुश्किलें दूर हो गई। नदी को पुनर्जीवित कर ग्रामीणों ने यह भी साबित कर दिया कि सिर्फ सरकारी मदद के भरोसे किसी समस्या के समाधान के इंतजार में बैठे रहने से तकलीफें दूर नहीं होंगी।

७० दिन की मेहनत
आरा-केरम गांव के वन रक्षा समिति के अध्यक्ष रमेश बेदिया ने बताया कि पहाडिय़ों की गोद मे बसे इस गांव मे साल भर पहले तक बारिश का सारा पानी बहकर बेकार हो जाता था। नदी सूखने के कारण ग्रामीणों के सामने पेयजल का संकट खड़ा हो गया। ग्रामीणों को प्रारंभ में सरकारी सहायता की उम्मीद थी। इस पर पानी फिरने के बाद ग्रामीणों ने आपसी विमर्श के बाद अपने बूते ही नदी में वापस पानी लाने की ठानी। गांव के सभी डेढ़ सौ ग्रामीणों ने करीब ७० दिन की हाड़तोड़ मेहनत ( Hard Work ) के बाद सफलता प्राप्त कर ली।

पहुंच गए मंजिल तक
गांव की महिला पुरूषों ने कंधे से कंधा मिलाते हुए इस अभियान को मंजिल तक पहुंचा दिया। ग्रामीणों ने आसपास की पहाडिय़ों के ऊपर वर्षा का पानी रोकने के लिए जल संग्रहण संरचनाएं बनाई। पहाड़ों से निकलने वाली 600 प्राकृतिक जलधाराओं को पत्थरों से बांधकर नदी की तरफ मोड़ दिया। इससे व्यर्थ बहता पानी नदी में आ गया। खास बात यह है कि इस काम के लिए किसी प्रकार की सरकारी मदद नहीं (No Govt Aid) ली गई है। आरा-केरम के बाद अब आस-पास के गांवों में भी डंभा को सदानीरा बनाने की पहल शुरू की गई है।