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महाधिवक्ता ने हाईकोर्ट को दिग्भ्रमित किया,किया जाए पदमुक्त-मरांडी

बाबूलाल मरांडी ने इस संबंध मे मुख्यमंत्री रघुवर दास को पत्र लिखकर कहा कि...

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babu lal marandi

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(पत्रिका ब्यूरो,रांची): झारखंड विकास मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि लौह अयस्क खनन कंपनी शाह ब्रदर्स पर लगाए जुर्माने के मामले में राज्य सरकार के महाधिवक्ता ने खान एवं भूतत्व विभाग के बगैर सहमति के झारखंड उच्च न्यायालय को दिग्भ्रमित किया।

बाबूलाल मरांडी ने इस संबंध मे मुख्यमंत्री रघुवर दास को पत्र लिखकर कहा कि आर्थिक अपराध से संबंधित मामले में संज्ञान लेकर राज्य सरकार महाधिवक्ता को तुरंत पदमुक्त करें। उन्होंने इस गंभीर मामले की उच्चस्तरीय जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली कमेटी से कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।


बाबूलाल मरांडी ने शनिवार को रांची स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पश्चिम सिंहभूम के उपायुक्त द्वारा शाह ब्रदर्स पर लगाई गई जुर्माना राशि 250.63 करोड़ रुपये एकमुश्त अदा करने के आदेश को महाधिवक्ता द्वारा खान एवं भूतत्व विभाग के बगैर सहमति के उच्च न्यायालय को दिग्भ्रमित किया।


उन्होंने आरोप लगाया कि महाधिवक्ता ने हाईकोर्ट में खंडपीठ के सामने किसी खास कंपनी को फायदे पहुंचाने के लिए झूठ बोला है, यह एक बहुत बड़ा गंभीर मामला है और मिसकंडक्ट ऑफ कोर्ट का भी मामला बनता है।


उन्होंने बताया कि महाधिवक्ता द्वारा राज्य सरकार का पक्ष रखने के आधार पर हाईकोर्ट ने शाह ब्रदर्स को 11 अक्टूबर तक 40 करोड़ रुपये और शेष बकाया पेनाल्टी राशि को सितंबर 2020 तक जमा कराने का आदेश दे दिया । साथ ही प्रथम किस्त जमा होने के तुरंत बाद परमिट-चालान निर्गत करने का आदेश दिया। बाबूलाल मरांडी ने बताया कि अदालत का यह आदेश जैसे ही खान एवं भूतत्व विभाग के अधिकारियों को मिली, तो सभी पदाधिकारी आश्चर्यचकित रह गये, क्योंकि पट्टेधारी शाह ब्रदर्स और खान विभाग के बीच किसी भी संचिका में कोई भी इस प्रकार की सहमति और परिवहन चालान निर्गत करने का आदेश नहीं है और किश्त में जुर्माने की राशि लेने का कोई निर्णय नहीं हुआ है।


झाविमो प्रमुख बाबूलाल मरांडी ने बताया कि पहले भी पार्टी इस मुद्दे को उठाती रही है कि सरकार नियमों की अनदेखी कर शाह ब्रदर्श को फायदा पहुंचाना चाहती है। जब यह मामला कैबिनेट की बैठक में भी आया था, तो सरकार के एक मंत्री ने यह कहकर इसका विरोध किया था कि वे इस संचिका पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे, उन्हें जेल नहीं जाना है।