
tara sahdev
रवि सिन्हा की रिपोर्ट...
(रांची): बहुचर्चित तारा शाहदेव लव-जिहाद मामले में मंगलवार को रांची की फैमिली कोर्ट ने तलाक वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए तलाक देने का फैसला सुनाया। नेशनल शूटर तारा शाहदेव ने रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल पर जबरन धर्म परिवर्तन कराने और दहेज प्रताड़ना समेत मारपीट संबंधी कई आरोप लगाये थे।
जबरन धर्म परिवर्तन के लिए प्रताड़ित करने का आरोप
रांची फैमिली कोर्ट के जज बी.के. गौतम की अदालत में राष्ट्रीय निशानेबाज तारा शाहदेव की ओर से 7 जुलाई 2014 को हुई शादी के मामले में रंजीत सिंह कोहली उर्फ रकीबुल हसन पर मुस्लिम धर्म को छिपाते हुए शादी करने और जबरन धर्म परिवर्तन के लिए प्रताड़ित करने तथा दहेज को लेकर तलाक की अर्जी दाखिल की थी। यह मुकदमा करीब चार साल चला।
दो और एक गवाह पेश
हाई प्रोफाइल केस में तारा शाहदेव की ओर से दो गवाह पेश किये गये, जिसमें उसके भाई और पिता ने गवाही दी, जबकि रंजीत उर्फ रकीबुल की ओर से सिर्फ एक गवाह अदालत में पेश किया गया।
जलालत से छुटकारा
फैमिली कोर्ट का फैसला आने के बाद तारा शाहदेव ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि चार वर्षों के दंश से आज उन्हें छुटकारा मिल गया। उन्होंने बताया कि जब भी वह कोई फार्म भरने जाती थी, तो उसके शादी और पति के बारे में पूछा जाता था, इस दौरान उन्हें काफी पीड़ा का सामना करना पड़ा। उन्होंने परिवार, समाज और मीडिया की ओर से मिले सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब भविष्य अच्छा हो, यही वह ईश्वर से प्रार्थना करती है।
आरोपित ने दी सफाई
दूसरी तरफ जेल में बंद रंजीत उर्फ रकीबुल ने अदालत परिसर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि तारा की ओर से कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया, न तो निकाहनामा की बात सामने आयी और न ही कोई तस्वीर या अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किये गये, सिर्फ उसकी गवाही पर ही अदालत ने फैसला सुनाया। उन्होंने यह भी कहा कि उसने कभी तारा का धर्म परिवर्त्तन कराने के लिए कोई दबाव नहीं डाला और न ही कभी प्रताड़ित किया।
हिन्दू मैरिज एक्ट की दो धाराओं के तहत याचिका
गौरतलब है कि तारा शाहदेव ने हिन्दू मैरिज एक्ट की दो धाराओं के तहत यह याचिका अदालत में दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि शादी के बाद से रंजीत उर्फ रकीबुल के असली धर्म का पता चला और रकीबुल उस पर धर्म परिवर्त्तन के लिए मजबूर करने लगा और दहेज को लेकर प्रताड़ित करने लगा। याचिका में तारा शाहदेव ने कहा कि हिन्दू मैरिज एक्ट की धारा 2 और 5 के अनुसार यह शादी अवैध है,क्योंकि हिन्दू मैरिज एक्ट के तहत शादी में दोनों का हिन्दू होना जरूरी है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट द्वारा इसी तरह के एक मामले में वर्ष 2009 में सुनाये गये एक फैसले का भी हवाला दिया था। तलाक की अर्जी हिन्दू मैरिज एक्ट की धारा 12 (1)(सी) के तहत अवैध विवाह को शून्य घोषित करने और धारा 13 (1) (1-ए) तलाक (विवाह विच्छेद) का आग्रह करते हुए याचिका दायर की गयी थी।
Published on:
26 Jun 2018 04:02 pm
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