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सोनकच्छ. कड़वे प्रवचनों के लिए देश- दुनिया में विख्यात रहे समाधिस्थ जैन आचार्य तरुणसागर के 53वें तरुण अवतरण महोत्सव (जन्म जयंती) के 26 दिवसीय तरुण जीवन संवाद कार्यक्रम में उनके एक मात्र शिष्य क्षुल्लक पर्व सागर ने शुक्रवार को बताया कि आज जिन्हें देश क्रांतिकारी राष्ट्रसंत तरुणसागर के नाम से जानती और मानती है। देश के प्रमुख ख्याति प्राप्त संत के रूप में मानती है तो आप यह मत समझना कि उनका जन्म किसी राजघराने या किसी नामचीन परिवार और बड़े शहर में हुआ था, बल्कि सच तो यह है कि उनका एक पक्का इरादा उन्हें यह पहचान दे गया। साथ ही बताया कि गुरुदेव तरुणसागर का जन्म मध्यप्रदेश के दमोह जिले के 700 की आबादी वाले गहुंची गांव में हुआ, जिसका नाम 2010 में राज्य सरकार द्वारा संत तरुणसागर धाम रखा गया था। तरुणसागर के गृहस्थ परिवार में माता- पिता के बाद वे 4 भाई व 3 बहन थे। तरुणसागर अपने परिवार में सबसे छोटे व नटखट स्वभाव के होने के कारण पूरे परिवार, गांव व विद्यालय में सबके लाड़ले व प्रिय थे। उक्त विषय पर तरुण संवाद के पांचवे दिन शुक्रवार को पर्व सागर ने सोशल मीडिया संबोधन के साथ कही।
26 पेड़ लगाकर पौधारोपण किया गया
सोशल मीडिया के माध्यम से तरुण संवाद के पांचवें दिन संवाद से पूर्व में संवाद कार्यक्रम में सम्मिलित होने वाले देश- दुनिया के भक्तों से पर्वसागर द्वारा पांचवां सवाल किया गया, जिसमें पूछा कि समाधिस्थ आचार्य तरुणसागर गृहस्थ अवस्था में कितने भाई बहन थे। इस प्रकार प्रश्न के बाद सम्पूर्ण जीवन घटनाक्रम का दृष्टांत संवाद के अंतर्गत सुनाया। राजस्थान के भरतपुर गुरु परिवार द्वारा 26 दिवसीय अवतरण महोत्सव के अंतर्गत विश्व पर्यावरण दिवस पर 26 पेड़ लगाकर पौधारोपण किया गया, संध्या गुरु आरती मोहाली पंजाब गुरुपरिवार द्वारा की गई।
पत्रिका फेसबुक पेज पर लाइव आरती
प्रतिदिन रात 8 बजे ऑनलाइन आरती हो रही है। पत्रिका के फेसबुक पेज पत्रिका देवास पर इस लाइव आरती को देखा जा सकता है।
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Published on:
05 Jun 2020 08:18 pm
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