
Baraq Obama With Lord Hanuman News In HIndi
मंदसौर। ये महिमा सिर्फ श्रीराम भक्त हनुमान जी की ही हो सकती है। मध्यप्रदेश में भगवाल हनुमान जी का एक मंदिर एेसा भी है जहां की मुर्ति की प्रतिमा की विशेषता ये है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भी यहां की मूर्ति को जेब में आज भी रखते है। इस मंदिर में जो मांगा जाता है, भक्त कहते है कि वह मिलता है। मुर्ति एक वृक्ष के नीचे से प्रकट हुई थी, बाद में धुमधाम से इसको प्राणप्रतिष्ठा की गई। बराक ओबामा जब राष्ट्रपति का चुनाव लडे़ थे, तब यहां पर उनकी जीत के लिए अनुष्ठान हुआ था।
मध्यप्रदेश के मालवा के मन्दसौर में तलाई वाले बालाजी का दरबार को अगाध आस्था और श्रद्धा के केन्द्र के रूप में जाना जाता है। बराक ओबामा द्वारा भेजे गए अधिकारियों ने यहां पर आकर हनुमान मंदिर में अनुष्ठान करवाया था। अब स्थिति ये है कि यहां यदि बालाजी को चोला चढ़ाना है तो आज की स्थिति में सामान्य वार में 7 वर्ष तो मंगलवार के लिए ९,४९० हजार दिनाों का इंतजार भक्तों को करना पड़ रहा है। भक्त कहते है कि ट्रेन में सामान्य रेलवे २०० से ३०० तक की प्रतिक्षा का टिकट देता है, लेकिन इतने हजार दिन का इंतजार तो सिर्फ इस मंदिर में ही करना पड़ता है।
श्रीराम रक्षा स्त्रोत से होती है सुबह
श्री तलाई वाले बालाजी के दरबार में लड्डु चूरमे का प्रसाद चढ़ाने, राम रक्षा स्त्रोत का पाठ करवाने और चोला चढ़ाने से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है। यही वजह है कि यहां हर दिन चोला चढ़ाने के बावजूद चोले की प्रतीक्षा सूची सालों की लम्बित है। मन्दिर प्रबंधकों की माने तो मंगलवार को चोला चढ़ाने के लिए 26 साल, शनिवार के लिये 21 साल, सामान्य अन्य वारों के लिये करीब 7 साल का इंतजार भक्तों को करना पड़ता है। इतना ही नहीं राम रक्षा स्त्रोत करवाने के लिए 2 साल और लड्डु चूरमे के भोग के लिए भी करीब 2 साल की प्रतिक्षा भक्तों को करना पड़ेगी। यहां सुबह 5 बजे से भक्तों का सैलाब उमडऩा शुरू होता है जो रात 10 बजे तक अनवरत जारी रहता है।
पट बंद होने पर गूंजते है भजन-कीर्तन के सूर
तलाई वाले बालाजी का मंदिर एक ऐसा अनूठा मंदिर है जहां पट खुलने से राम रक्षा स्त्रोत की गूंज गूंजती है तो वहीं रात को पट बन्द होने पर सुन्दरकांड, हनुमान चालिसा और भजन कीर्तन के सूर गूंजते रहते है। प्रतिदिन सैकड़ों से लेकर हजारों की तादाद में भक्त यहां मत्था टेककर दयालु बाबा के नाम से पहचाने जाने वाले तलाईवाले बालाजी का आशीर्वाद प्राप्त करते है। भक्ति और श्रद्धा इतनी अटूट है कि व्यापारी और नौकरी पर जाने वाले लोग पहले दरबार में मत्था टेकते है और फिर अपने काम-काज की शुरूआत करते है।
700 साल पुराना है इतिहास
लगभग सात सौ वर्ष पुरानी बालाजी की प्रतिमा प्रारम्भ में विशाल वटवृक्ष के नीचे विराजित थी, यह स्थान शहर से दूर सूबा साहब (कलेक्टर) बंगले के पास स्थित था। मंदिर के पास ही एक तलाई थी जिस पर वर्तमान में नगरपालिका तरणताल स्थित हैं। किवंदती हैं कि इस प्रतिमा की स्थापना अत्यंत सिद्ध परमहंस संत द्वारा की गई थी, बहुत समय तक यहां बनी धर्मशाला, तलाई एवं मंदिर साधु संतों एवं जमातों का विश्राम एवं आराधना स्थल रहा। ब्रह्मलीन पूज्य राजारामदासजी महाराज अधिष्ठाता पंचमुखी बालाजी मंदिरए भीलवाड़ा ने भी 1940 ईस्वी में यहां रहकर साधना की हैं।
Published on:
01 Apr 2018 11:03 am
बड़ी खबरें
View Allरतलाम
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
