
बंगाली समाज का उत्सव: दुर्गा उत्सव की संधि पूजा में उमड़े समाजजन
रतलाम। बंगाली समाज के लिए रविवार को का दिन विशेष रहा। नवरात्रि के महाअष्टमी पर विशेष संधि पूजा की हुई।
दुर्गा माई के जयकारे एवं ढाक ताशे के साथ दुर्गा पूजा का उल्लास और उमंग चरम पर था। अष्टमी के समापन एवं नवमी के प्रारंभ होने के बीच के काल में होने से इसका विशेष महत्व है। 108 कमल पुष्प एवं दीपों से देवी मां की पूजा की गई। शुक्रवार से बंगाली समाज की 5 दिवसीय दुर्गा पूजा, देवी बोधन, कल्पारम्भ एवं अधिवास के साथ प्रारंभ हुई।
षष्टी पूजा की गई
समाज की अनेक महिलाओं द्वारा अपने बच्चों के स्वास्थ्य एवं दीर्घायु के लिए व्रत रखकर शाम को षष्टी पूजा की गई। ढोल ताशों की ध्वनि में धुनुची नृत्य के साथ मां दुर्गा के आमंत्रण की पूजा की गईं। शनिवार को सप्तमी की पूजा के अवसर पर विभिन्न प्रकार के पवित्रजल से स्नान पूजन के पश्चात स्थापना की गई। भगवान गणेश की पत्नी के रूप में कोलाबऊ की पूजन एवं स्थापना हुई। अष्टमी की संधि पूजा के पश्चात सोमवार को नवमी की आरती, पूजा एवं पुष्पांजलि के साथ देवी मां की पूजा अर्चना की जाएगी। बंगाली समाज की दुर्गापूजा का समापन मंगलवार की सुबह 10.30 बजे दर्पण विसर्जन पूजा. सिंदूर खेला के पश्चात चल समारोह के रूप जलविसर्जन के रूप में होगा।
विदाई पर लगाए उदघोष
माँ दुर्गा को उनके परिवार के साथ मायके से अपने ससुराल की विदाई की मान्यता के साथ चल समारोह में उदघोष लगाए जाएंगे। अगले वर्ष देवी मां की आराधना के पुन: अवसर मिलने की आशा और उल्लास के साथ पूजा सम्पन्न होगी। बंगाली समाज की दुर्गा पूजा में अज्ञान पर ज्ञान की विजय एवं नारी शक्ति के जागरण का संदेश होता हैं।
आकर्षण का केंद्र
स्थानीय जवाहर नगर स्थित श्रीरामकृष्ण विवेकानंद आश्रम परिसर में आयोजित दुर्गापूजा में बंगाल के मूर्तिकार द्वारा निर्मित महिषासुर मर्दिनी माँ दुर्गा की विशाल प्रतिमा सहित देवी सरस्वती एवं लक्ष्मी तथा भगवान गणेश एवं कार्तिकेय की प्रतिमाएं लोगों के आकर्षण का केंद्र है।
Published on:
07 Oct 2019 06:25 pm
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