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MP में भाजपा नेता के चुनाव लड़ने पर लगी रोक

मप्र में राहुल गांधी की भारत जोड़़ो यात्रा निकाल रही है और चुनाव की तैयारियां चल रही है। दूसरी तरफ भाजपा की इस महिला नेत्री पर नगरीय प्रशासन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की।

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रतलाम

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Kamal Singh

Dec 02, 2022

MP में भाजपा नेता के चुनाव लड़ने पर लगी रोक

MP में भाजपा नेता के चुनाव लड़ने पर लगी रोक

रतलाम. ताल नगर परिषद की तत्कालीन अध्यक्ष श्वेता बंटी पितलिया को राज्य सरकार के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने दो साल के लिए अयोग्य घोषित कर दिया है। श्वेता पितलिया पर नगर परिषद में खरीदी में घोटाले का आरोप था। जांच के बाद कुछ मामलों में उन्हें दोषी पाया गया है। श्वेता पितलिया 17 जनवरी 2015 से लेकर 4 जनवरी 2020 तक नगर परिषद में अध्यक्ष पद पर कार्यरत रही है।

यह था मामला
नगर परिषद में खरीदी में भ्रष्टाचार और नियम विरुद्ध खरीदी को लेकर एक शिकायत की जांच संभागीय संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं बेकास उज्जैन ने की थी। इसमें नगर परिषद ताल के अन्य अधिकारियों के अलावा कतिपय अनियमितताओं के लिए श्वेता संजय बंटी पितलिया भी उत्तरदायी पाई गई। जांच प्रतिवेदन के आधार पर श्वेता पितलिया को कारण बताओं सूचना पत्र जारी कर जवाब मांगा गया था। पितलिया ने नगर परिषद से कुछ दस्तावेज लेने के बाद भी उत्तर प्रस्तुत नहीं किया था। इसके बाद उन्हें दो साल के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया।

ये आरोप थे उन पर
- पितलिया पर 2018-19 में विभिन्न सामग्रियां शासन आदेश अनुसार जैम पोर्टल से क्रय न करने का आरोप लगाया गया था। पितलिया ने प्रतिवाद उत्तर में उल्लेख किया गया है कि जैम पोर्टल से खरीदी एक लाख रुपए से अधिक होने पर की जाती है। जांच में यह सामने आया कि जो सामग्री एक लाख से कम की खरीदी गई वे पूर्व से स्वीकृत दर पर ही खरीद ली गई जो गलत है।

- वित्तीय वर्ष 2015-16 में व्यक्तिगत शौचालय निर्माण के लिए 50.064 लाख की स्वीकृति परिषद ने दी जबकि पीआईसी को 50 लाख से कम की स्वीकृति देने का अधिकार था। इसमें भी नगरीय प्रशासन एवं विकास से वित्तीय स्वीकृति प्राप्त किया जाना नहीं पाया गया है।

ृ- इसके अलावा भी श्वेता पितलिया पर कई अन्य आरोप लगाए गए जो जांच में प्रमाणित साबित हुए। आदेश में कहा गया कि अध्यक्ष की शक्तियों तथा दायित्वों का विधि अनुसार पालन करने में श्वेता पितलिया विफल रही है। इसलिए उन्हें आगामी दो वर्ष के लिए निर्वाचन से निरर्हित करते हुए प्रकरण का निराकरण किया जाता है।