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जनजातीय विकास की पकड़ में आई बड़ी पोल, जानिए पूरा कच्चा-चिट्ठा

- मध्यप्रदेश में जनजातीय इलाकों में केन्द्र से प्राप्त बजट का उपयोग नहीं- जनजाति शोध व अनुसंधान पर पूरा खर्चा, आधारभूत सुविधाओं में धेला तक नहीं खर्चा

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जनजातीय विकास की पकड़ में आई बड़ी पोल, जानिए पूरा कच्चा-चिट्ठा

जनजातीय विकास की पकड़ में आई बड़ी पोल, जानिए पूरा कच्चा-चिट्ठा

सिकन्दर पारीक
रतलाम। प्रदेश सरकार जनजातियों की भाषा, कला व संस्कृति के शोध पर तो गंभीर है लेकिन जनजातीय इलाकों में आधारभूत सुविधाएं, स्वास्थ्य व शिक्षा के मामले में एक कदम पीछे है। इसका अंदाजा जनजातीय विकास के लिए केन्द्र की ओर से प्रदेश को मिले बजट को देखने से लगाया जा सकता है। प्रदेश सरकार बजट पर कुंडली मार बैठी है, अभी तक धेला तक खर्च नहीं किया। संभवत: योजनाओं पर कार्य नहीं होने का ही नतीजा है कि जनजातीय कार्य विभाग की वेबसाइट में योजनाओं की जानकारी लेने पर सामग्री निर्माणाधीन लिखा दिख रहा है।
प्रदेश के यह है हालात
- अनुसूचित जनजातियों के कल्याण को लेकर संविधान के अनुच्छेद 275 (1) के तहत पांच केन्द्र प्रायोजित योजनाओं व प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन के तहत वर्ष 2021-22 में 5319.10 लाख का बजट मिला, लेकिन उपयोग नहीं किया गया।
- जनजातीय उप योजना को विशेष केन्द्रीय सहायता के रूप में वर्ष 2021-22 में 12268.76 लाख का बजट आवंटित, लेकिन उपयोग नहीं। केन्द्र से राशि तो प्राप्त हो गई है।
- पीवीटीजी विकास में इस अवधि में प्राप्त 2888.69 बजट भी खर्च नहीं
- अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए मैटि्रक पूर्व व मैटि्रकोत्तर छात्रवृति की बजट राशि पर भी कुंडली
(नोट- यह जानकारी 25 जुलाई 2022 तक प्राप्त सूचनाओं के आधार पर है)
यहां जरूर बजट व्यय
जनजातीय अनुसंधान संस्थान को बतौर सहायता वर्ष 2021-22 में प्राप्त 484.58 लाख का पूरा उपयोग कर लिया गया है। इसमें जनजातियों का मानव शास्त्रीय शोध अनुसंधान, विकास कार्य का मूल्यांकन अध्ययन, भाषा व संस्कृति पर शोध और विभिन्न कार्यशालाओं का संचालन शामिल हैं।
नुकसान यह
पीवीटीजी के तहत प्रदेश में 2314 गांवों में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजाति के 5.51 लाख परिवातों के कल्याण को लेकर कार्य करने होते हैं। वर्ष 2019-20 में भी इस मद में प्राप्त 7433.21 लाख में से 2188.11 का ही उपयोग हो सका। जाहिर है कि ऐसे में राज्य सरकार विशेष पिछड़ा परिवारों के कल्याण को लेकर योजनाएं संचालित नहीं कर पा रही है। इसी तरह अनुच्छेद 275 (1) के तहत जनजातीय इलाकों में आधारभूत सुविधाएं मुहैया करवाने के साथ ही शोषण व दमन के विरुद्ध सुरक्षा देना, बेहतर स्वास्थ्य व शिक्षा, इनके शीघ्र विकास सहित विभिन्न कामों के लिए सहायता अनुदान के रूप में केन्द्र बजट जारी करता है, जिसका पूरा उपयोग नहीं हो रहा है।

इनका कहना है
केन्द्र से राशि तो प्राप्त हो गई है। अब प्रदेश स्तर पर विस्तृत कार्ययोजना बनाकर शीघ्र राशि योजनानुसार जारी कर दी जाएगी।
मीना सिंह, मंत्री, जनजाति कलयाण विभाग