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न अपराध सहेंगे न ही करने देंगे

- पत्रिका निर्भीक बचपन अभियान में बोले नाहर कान्वेट स्कूल के बच्चे

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vikram ahirwar

Dec 20, 2016

ratlam

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रतलाम.
शहर के सागोद रोड पर मंगलवार को श्री नाहर कान्वेट सिनीयर सेंट्रल स्कूल में 250 से ज्यादा बच्चों ने पत्रिका निर्भीक बचपन अभियान का हिस्सा बनकर बाल अपराध से लडऩे का संकल्प लिया। अभियान के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे ने निर्भीक बचपन एवं निर्भीक बालिका पर बच्चों को कानूनी पहलुओं से अवगत कराया। जब सवालों का दौर चला तो कोमल बाल मन ने हर उस पहलु को उठाया जो मासूम बचपन की मुस्कान का रोड़ा बन गए हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने भी कुछ उदाहरण तो कुछ इन्वेस्टीगेशन आधारित जानकारियों के साथ बच्चों के सवालों के जवाब भी दिए।

पत्रिका अभियान निर्भीक बचपन का दूसर चरण मंगलवार को श्री नाहर कान्वेट सिनीयर सेंट्रल स्कूल में चला। दोपहर करीब 1 बजे आरंभ हुए अभियान के कार्यक्रम में रतलाम के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे पुलिस टीम के साथ शामिल हुए। चाइल्ड लाइन के जिला समन्वयक प्रेम चौधरी और पत्रिका की टीम ने अभियान की जानकारी दी। डॉ. चौबे ने सबसे पहले बच्चों को अपराध से निपटने में पुलिस की भूमिका, बाल अपराध के लिए बने कानून, सहायता के लिए हेल्पलाइन और विशेष सेवाओं की जानकारी दी। इसके बाद दौर चला बच्चों के सवालों का। निर्भया कांड से लेकर स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों पर सामने आने वाले छेड़छाड़ के मामले उठाए गए। बच्चों ने अपराध की दर कम करने में पुलिस और स्कूलों की भूमिका से जुड़े सवाल भी किए। इस पर डॉ. चौबे ने उदाहरणों के साथ बच्चों के बाल मन की जिज्ञासा को शांत किया।

सर, पुलिस तो डराती है फिर कैसे दे सूचना

बाल मन पत्रिका अभियान में हर उस सवाल का जवाब चाहता था, जो उनके जेहन में आ रहे थे। स्कूल के कक्षा 9वीं से 12वीं तक के बच्चों ने करीब 20 से 25 सवालों के माध्यम से बाल अपराध, वर्तमान हालात और सुरक्षा तथा बचाव पर जानकारी ली। बच्चों ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के जवाबों के बीच यह भी पूछ लिया कि सर, पुलिस को सबको डराती है, फिर हम कैसे सूचना देगे। इस पर डॉ. चौबे ने साफ किया कि बदमाशों की धरपकड़ के लिए पुलिस को सख्त होना पड़ता है, हर इंसान के साथ एक जैसा व्यवहार नहीं किया जाता। अब तो पुलिस थानों पर हेल्प डेस्क पर महिलाएं बैठती है।

बुकलेट बांटकर बच्चों को दिए सूचना फॉर्म

अभियान के दौरान स्कूल के डायरेंक्टर रेवंत नाहर, प्राचार्य राकेश नाहर एवं सलाहकार सहित स्कूल स्टॉफ की मौजूदगी में सभी 250 बच्चों के बीच बाल एवं महिला अपराध पर प्रकाशित बुकलेट का वितरण किया गया। साथ ही किसी भी घटना की सूचना के लिए एक फॉर्म भी प्रदान किया गया। इस फॉर्म को स्कूल बच्चे भरने के बाद संस्था, पत्रिका कार्यालय, पुलिस विभाग या चाइल्ड लाइन के रतलाम कार्यालय को दे सकते हैं। जरूरत पडऩे पर पत्रिका सहित इन सभी स्तरों पर दर्शाए गए नंबरों पर संपर्क किया जा सकेगा।