
datia news (भाई ने की भाई की हत्या Photo Source- Patrika)
फोटो-आरटी-0802-डॉ अभय ओहरी
गेस्ट राइटर जयस के प्रादेशिक सरंक्षक है।
रतलाम। अपने देश में 9 अगस्त अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस उनके अधिकारों की सुरक्षा, संस्कृति के संरक्षण, जल जंगल जमीन पर्यावरण की सुरक्षा तथा आदिवासी अस्मिता भाषा परंपराओं को बचाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। 1982 में संयुक्त राष्ट्र संघ की जिनेवा बैठक में दुनियाभर में निवासरत आदिवासी समुदायों के संस्कृति भाषा परंपरा प्रकृति संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए 9 अगस्त 1982 के दिन संकल्प लिया गया था इसी दिन को अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस के रूप से मान्यता मिली। पहली बार 1995 में इसकी शुरुआत की गई।
भारत में इसकी शुरुआत 2001 से जनजाति मंत्रालय केंद्र सरकार के निर्देश पर मानने का निर्णय लिया गया ! भारत के लगभग 17 राज्यों में आदिवासी समुदाय निवासरत है। मध्यप्रदेश में भील, भिलाला, गोंड, बेगा, सहारिया, भारिया, कोरकू, बारेला, कोल, उरांव सहित लगभग 26 जनजातीय प्रमुख रूप से पाई जाती है। भारत में मुंडा जनजाति के बाद भील जनजाति सबसे बड़ी जनजाति है, जो मध्यप्रदेश राजस्थान गुजरात महाराष्ट्र में निवासरत है! आज के दौर में जहां पूरे देश में पाश्चात्य संस्कृति चलन के कारण जीवनमूल्यों का पतन हो रहा है वहीं जनजाति समुदायों में अपनी संस्कृति भाषा, बोली परंपराओं को आनेवाली पीढ़ी के साथ साझा करने ओर अपनी पहचान बनाने में लगा है। आज भी कृषि कार्य में मदद हेतु हलमा जैसी परंपरा जिंदा है।
दाइयों के पारंपरिक ज्ञान
इस वर्ष की थीम संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आदिवासी दाइयों के पारंपरिक ज्ञान और जड़ी बूटियों के उपयोग से स्वास्थ्य को कैसे बेहतर बनाया जाए इसको लेकर निर्धारित की गई है। अब भी पंचमढ़ी के घने जंगलों में कई औषधियां है, जिनकी पहचान ओर बेहतर जीवन पद्धति को अपनाने के लिए उनका उपयोग जनजाति समुदाय कर रहा है और आयुष मंत्रालय को रिसर्च करने में मदद कर रहा है। आइए हम सब मिलकर अपने देश की इस धरोहर को समझने ओर बचाने में जनजाति समुदाय के साथ मिलकर प्रकृति और उनसे होने वाले लाभ को जन जन तक पहुंचाने का संकल्प ले।
Updated on:
08 Aug 2026 06:00 am
Published on:
08 Aug 2026 06:00 am
