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रतलाम। एक वक्त था, जब दिन में दो मर्तबा नलों में पानी आता था, लेकिन अब एक दिन छोड़कर आता है। शहर की प्यास बुझाने वाले धोलावाड़ बांध से हर दिन साढ़े तीन लाख लोगों के पेयजल की मांग की पूर्ति करने वाला पानी छोड़ा जाता है, फिर भी ३ लाख से कम आबादी वाले शहर की कॉलोनियों में गर्मियों के दौरान पेयजल किल्लत के हालात खड़े हो जाते हैं। लाखों खर्च होने के बावजूद हर साल प्रति व्यक्ति औसत १३५ लीटर पानी का आंकड़ा छूना मुश्किल हो रहा है।
शहर के सबसे बड़े जल आपूर्ति वाले धोलावाड़ बांध से ४ करोड़ ८० लाख लीटर पानी छोड़ा जा रहा है। यह पानी की वह मात्रा है, जिससे करीब ३ लाख ५० हजार लोगों तक आपूर्ति की जा सकती है। बावजूद इसके शहर में गर्मियों के दौरान ९० लाख गैलन पानी की रोजाना मांग की पूर्ति नहीं हो पाती है। शहर की कई कॉलोनियां जल संकट का सामना हर साल करती हैं। नगर निगम ने निजी फर्मो से करार कर बीते तीन सालों में २ करोड़ ४१ लाख रुपए पेयजल के परिवहन पर खर्च चुका है, पर्याप्त पानी के बाद भी शहर में पानी की किल्लत के हालात काबू में नहीं आ पाते। जानकारों की मानें तो अपर्याप्त संसाधनों के कारण पानी बर्बाद हो रहा है, इससे शहर को मिलने वाले पानी की मात्रा धोलावाड़ बांध से छोड़े जा रहे पानी की तुलना में कम हो गई है। इसका असर शहर की कॉलोनियों तक टैंकरों से पानी भेजने के तौर पर सामने आता है।
धोलावाड़ जलाशय दे रहा पर्याप्त मात्रा में पानी
दो लाख ६५ हजार की आबादी वाले शहर में फिलहाल धोलावाड़ बांध ही बड़ा विकल्प हैं। हालांकि निजी एवं सरकारी जल स्त्रोत भी हैं, लेकिन इनसे पानी की मांग का महज १४ प्रतिशत हिस्सा ही पूर्ति हो रहा है। धोलावाड़ा बांध से शहर के लिए रोजाना ०.४८ एमसीएम पानी दिया जा रहा है। इससे एक दिन छोड़कर शहर को पानी दे रहे हैं। जबकि यह मात्रा शहर में रोजाना पानी देने के लिए पर्याप्त है, फिर भी हालात हर साल गहराते जा रहे है।
- धोलावाड़ से शहर को हर साल करीब १७.९० एमसीएम पानी दिया जाता है।
- रोजाना बांध से ०.०४८ एमसीएम पानी शहर के लिए छोड़ते हैं।
- फिलहाल शहर में ६५ लाख गैलन पानी रोजाना की जरूरत।
- हर साल १५ प्रतिशत की दर से गर्मियों मे बढ़ जाती है पानी की मांग।
- ४० हजार नल कनेक्शनों के जरिए शहर में एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई।
७० लाख गैलन तक पानी की रोजाना पंपिंग
एक दिन छोड़कर होने वाले पेयजल वितरण का ज्यादातर हिस्सा धोलावाड़ से आता है। हर दिन करीब ६५ से ७० लाख गैलन पानी की पंपिंग की जाती है, जबकि शहर तक महज ६० से ६२ लाख गैलन पानी ही पहुंच पा रहा है। ऐसे में रास्ते से गायब होते पानी को शहर के घरों तक पहुंचाने की कोशिश नाकाम हो रही है।
इस तरह शहर में पेयजल के हालात
- २९ हजार घरेलु एवं ११ हजार अन्य नल कनेक्शन।
- हर माह जल वितरण व्यवस्था का खर्च ७८-८० लाख।
- धोलावाड़ से शहर तक ३५ किमी की दो पाइप लाइन।
- २० लाख गैलन तक है पेयजल की मांग-आपूर्ति का अंतर।
बढ़ रहा मांग-आपूर्ति का अंतर
- शहर में पानी की सप्लाई फिलहाल ७६ प्रतिशत क्षेत्र में, जबकि १०० प्रतिशत क्षेत्र में होना चाहिए।
- प्रतिव्यक्ति पानी का वितरण ११० से ११५ लीटर ही, जबकि यह मात्रा प्रतिव्यक्ति १३५ लीटर होना चाहिए।
- गर्मी में पानी की औसत मांग ८५ लाख गैलन लीटर हर दिन, फिलहाल ६० से ६५ लाख गैलन लीटर पानी का वितरण।
Published on:
11 Mar 2018 06:12 pm

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