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वकील के नाम का फर्जी बिल से लगा रहे थे शासन को चपत

वकील के नाम का फर्जी बिल से लगा रहे थे शासन को चपत

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रतलाम

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kamal jadhav

Oct 10, 2019

वकील के नाम का फर्जी बिल से लगा रहे थे शासन को चपत

वकील के नाम का फर्जी बिल से लगा रहे थे शासन को चपत

रतलाम।स्वास्थ्य विभाग में पिछले महीनों में हुई गड़बडिय़ों की जांच अभी किसी परिणाम तक नहीं पहुंची है कि अब नई गड़बड़ी सामने आई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग (सीएमएचओ) कार्यालय के एक लिपिक ने क्षेत्रीय कार्यालय उज्जैन के एक अन्य लिपिक के साथ मिलकर उच्चतम न्यायालय के एक वकील के नाम से फर्जी बिल लगाकर शासन को चूना लगा कर एक लाख 44 हजार पांच सौ रुपए हड़पने का पूरा इंतजाम कर लिया। मामला उस समय संज्ञान में आया जब विभाग ने इन बिलों का संबंधित वकील से ही वेरिफिकेशन करवाया गया तो उसने कहा कि उसकी फीस 8000 रुपए प्रति केस है। उसका भुगतान भी इसी दर अनुसार किया गया है। कर्मचारियों ने प्रति केस 8000 हजार रुपए की बजाय 16500 रुपए के मान से फर्जी बिल लगाकर भुगतान दर्शा दिया है। सीएमएचओ डॉ. प्रभाकर ननावरे ने इस गड़बड़ी को लेकर दोनों कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए स्टेशन रोड थाने को पत्र लिखा है।

यह है पूरा केस
उच्चतम न्यायालय में रतलाम के 17 सफाई कर्मचारियों के नियमितिकरण की अवमानना याचिका लगाई हुई है। इसके लिए शासन की तरफ से उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली के अभिभाषक राहुल कौशिक को शासकीय अभिभाषक के रूप में नियुक्त किया हुआ है। उन्हें प्रति केस 8000 रुपए देना तय किए गए हैं। केस के लिए सीएमएचओ कार्यालय की लीगल शाखा के सहायक ग्रेड दो प्रवीण शर्मा और क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं कार्यालय उज्जैन में पदस्थ महेश कुमार यति को कार्य सौंप रखा है। इन्होंने 28 मई 2019९ को लेखा शाखा में जो बिल प्रस्तुत किए वे प्रति केस 16500 रुपए के मान से 2 लाख 80 हजार 500 रुपए का भुगतान के लिए लेखा शाखा में बिल प्रस्तुत किया। बिल की सत्यता की जांच कराई गई तो मामला सामने आ गया। अभिभाषक ने खुद ही अपनी फीस प्रति केस 8000 के मान से 17 केस की राशि 136000 रुपए होना बताकर इनका कच्चा चि_ा खोल दिया।

अधिवक्ता ने किया इनकार
सीएमएचओ ने स्टेशन रोड थाने को लिखे पत्र में कहा कि उन्होंने बिल के भुगतान को लेकर लेखापाल नवीन नागर को निर्देशित किया कि बिलों पर अंकित राहुल कौशिक के ई-मेल पर जानकारी प्राप्त करे। कौशिक ने मेल के जवाब में 13 जून 2019 को अवगत कराया कि उनके कार्यालय से दो लाख 80 हजार 500 रुपए का देयक जारी ही नहीं किया गया है। मूल देयकों में प्रवीण शर्मा और महेश कुमार यति ने लेटरहेड और सील में हेराफेरी करके देयक राशि 8000 के स्थान पर 16500 रुपए के बिल बनाकर प्रस्तुत किए हैं। प्रवीण शर्मा से जवाब मांगने पर उन्होंने महेशकुमार यति द्वारा लेन-देन करना बताया। यह झूठ पकड़ में आने के बाद प्रवीण शर्मा और यति ने 29 जून को अभिभाषक की फीस 8000 रुपए प्रति केस के मान से १७ केस की कुल राशि 136000 एवं अन्य न्यायालयीन फीस 8500 रुपए प्रति केस के मान से 1 लाख 44 हजार 500 रुपए का भुगतान प्रस्तुत करके बचने का प्रयास भी किया।
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एफआईआर का पत्र दिया है पुलिस को
दोनों कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत किए गए फर्जी बिलों को लेकर स्टेशन रोड थाने पर आवेदन भेजा है ताकि इनके खिलाफ आर्थिक गड़बड़ी का प्रकरण दर्ज हो सके। इन्होंने अधिवक्ता की फीस को दो गुना करके बिल प्रस्तुत किया है।
डॉ. प्रभाकर ननावरे, सीएमएचओ, रतलाम

आवेदन मिला है, जांच में लिया
सीएमएचओ कार्यालय से आवेदन मिला है जिसे जांच में लिया गया है। जांच के बाद ही इस पर कोई निर्णय होगा।
राजेंद्र वर्मा, टीआई स्टेशन रोड