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रतलाम के 31 हजार 869 किसानों ने उठाया खाद

कृषि उर्वरकों के वितरण एवं आपूर्ति के समाधान के लिए शुरू की ई-विकास प्रणाली, जिन 1025 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री (एग्रीस्टेक) नहीं बनी थी, उनके प्रकरणों का भी निराकरण किया

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E-token fertilizer distribution news ratlam

कृषि उर्वरकों के वितरण एवं आपूर्ति के समाधान के लिए शुरू की ई-विकास प्रणाली

रतलाम. किसानों को समय पर खाद सुचारू रूप से मिल सके, इसके लिए शासन ने ई-विकास प्रणाली ई-टोकन उर्वरक वितरण व्यवस्था शुरू की हैं। इसके अन्तर्गत अब तक जिले के 31 हजार से अधिक किसान खाद प्राप्त कर चुके हैं। जिन 1025 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री (एग्रीस्टेक) नहीं बनी थी, उनके प्रकरणों का भी निराकरण कर खाद उपलब्ध कराया है।

जिले में उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण है, वितरण सुचारु रूप से जारी है। कलेक्टर मिशा सिंह के निर्देशानुसार ई-विकास प्रणाली (ई-टोकन) के माध्यम से खाद वितरण किया जा रहा है। इस प्रणाली से अब तक 31 हजार 869 किसानों को उर्वरक वितरित किया है। उप संचालक कृषि आर के सिंह ने बताया कि 1 अप्रेल से प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों, विपणन संघ के वितरण केंद्रों, एमपी एग्रो गोदाम और निजी विक्रेताओं के माध्यम से किसानों को खाद उपलब्ध कराया गया है।

जिले में खाद की उपलब्धता
ई-टोकन प्रणाली छोटे, मध्यम और बड़े सभी काश्तकारों के लिए सुगम बनी है। जिले में यूरिया 11303 मे.टन, डीएपी 2269 मे.टन, पोटाश 506 मे.टन, एनपीके 7026 मे.टन और एसएसपी 6564 मे.टन समेत कुल 27670 मे.टन उर्वरक भंडारित है। किसानों से आग्रह है कि खरीफ फसलों में अनुशंसित उर्वरकों का आवश्यकतानुसार उपयोग करें।

ई-टोकन से मिलेगा किसानों को फायदा
उपसंचालक कृषि आरकेसिंह ने बताया कि इस ई-टोकन प्रणाली से खाद प्राप्त करने पर किसानों को खाद के लिए वितरण केंद्रों पर घंटों लाइनों में नहीं लगना पड़ता। किसानों को ऑनलाइन ई-विकास पोर्टल के माध्यम से ई-टोकन मिलता है, जिसमें खाद मिलने की तारीख, समय और केंद्र पहले से तय होता है।

पारदर्शिता और कालाबाजारी पर रोक
डिजीटल प्रणाली से यह सुनिश्चित होता है कि सही मात्रा और दर केवल पात्र किसानों को ही मिले, जिससे अवैध भण्डारण पर रोक लगती है।

रकबे के अनुसार खाद
किसानों को उनकी भूमि (रकबे) और बोई जाने वाली फसल के आधार पर सटीक मात्रा में एक ही बार में सूपर्ण उर्वरक मिल जाता है।

सुविधाजनक बुकिंग
किसान स्वयं अपने मोबाइल फोन से या किसी एमपी ऑनलाइन केंद्र के जरिये टोकन बुक कर सकते हैं।

विशेष प्रावधान
वृद्ध, दिव्यांग, सिकमी, मृतक किसान परिवारों और शासकीय फार्म/ कृषि अनुसंधान संस्थाओं के लिये पोर्टल पर विशेष सुविधा उपलब्?ध है।

ई-विकास प्रणाली क्या है
ई-विकास प्रणाली किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग म.प्र. शासन द्वारा शुरू की गई है एक डिजीटल पहल है, इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में किसानों को रासायनिक उर्वरकों (खाद) का पारदर्शी, सुगम और समय पर वितरण सुनिश्चित करना है। यह प्रणाली बिचौलियों को खत्म कर सीधे किसानों को लाभ पहुंचाती है।

ई-टोकन प्रणाली की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार है
ई-टोकन व्यवस्था किसान घर बैठे अपने मोबाईल के माध्यम से उर्वरक (यूरिया, डी.ए.पी., एन.पी.के आदि) प्राप्त करने के लिए ई-टोकन बुक कर सकते है। इससे उन्हें खाद वितरण केन्द्रो पर लम्बी लाईनो में नहीं लगना पड़ता है। पारदर्शिता यह प्रणाली केन्द्रीकृत है जो निर्माताओं, सरकारी एजेंसियों और खुदरा विक्रेताओं को आपस में जोड़ता है।

भूमि और रकबे का सत्यापन
यह प्रणाली एग्रीस्टेक पोर्टल से जुड़ी है, किसान इसमें अपनी भूमि का विवरण, (पट्टे वाली भूमि सहित) अपनी आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक के लिए टोकन जनरेट कर सकते है।

ई-टोकन कैसे प्राप्त करें
पंजीकरण एवं लॉगिन- ई-विकास पोर्टल पर आधार नंबर के जरिए लॉगिन कर सकते है।
विवरण और चयन- पोर्टल पर अपनी फसल और भूमि का विवरण देखने के आद आवश्यक उर्वरक का चयन करें।
टोकन जनरेशन- टोकन जनरेट होने के बाद किसानों को निर्धारित समय पर खाद केन्द्र पर जाकर अपना उर्वरक मिल जायेगा। सुविधा- टोकन मिलने के बाद निर्धारित समय पर सोसायटी या निजी विक्रेता के पास जाकर क्यू आर कोड दिखाकर आसानी से खाद प्राप्त की जा सकती है।

सब्सिडी और सरकारी सहायता
भारत सरकार किसानों को उर्वरक और कृषि यंत्रों पर अनुदान प्रदान करती है। जिससे खेती की लागत कम होती है। आप अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से सीधे संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकते है। अधिक जानकारी के लिये और तकनीकी सहायता के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि विस्तार अधिकारी या पटवारी से संपर्क कर सकते है।