20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अच्छी बारिश से जागी उम्मीद…बढ़ेगा 20 प्रतिशत रकबा

रतलाम. इस साल मानसून अच्छे संकेत लेकर आया है, सामान्य से 13 इंच अधिक बारिश हो चुकी है। पानी की कमी तो दूर होगी, जिले में करीब 20 प्रतिशत तक रकबा भी बढ़ेगा, हम बात कर रहे हैं रबी सीजन की। किसान खुश भी है, जिले में अब तक औसत वर्षा 48 इंच के करीब बारिश हो चुकी है, जो कि सामान्य औसत वर्षा से 13 इंच अधिक है।

2 min read
Google source verification
Patrika

rain raises

यह बात अलग है कि लगातार हो रही बारिश के कारण सोयाबीन की फसल में काफी नुकसान हुआ है। दूसरी तरफ राहत इसलिए भी है कि आगामी फसलों में पानी की किल्लत नहीं रहेगी। पिछले साल जिले का रबी सीजन में 1 लाख 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र का रकबा था, जिसमें किसानों ने गेहूं, चना, सरसो आदि फसलें लगाई थी। इस साल 2 लाख हेक्टेयर से अधिक पहुंचने की उम्मीद है। वर्तमान में खरीफ में कृषि भूमि का रकबा करीब साढ़े तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्र है।

इनका कहना
बारिश अच्छी हो रही है, मौसम के साथ ही बारिश भी अनुकूल होने से गेहूं का रकबा अधिक बढ़ेगा। इसके साथ ही मटर, मसूर, चना, सरसो मिलाकर सभी फसलों में करीब 20 प्रतिशत रकबा बढ़ेगा। 90 प्रतिशत किसान फसल लगा सकेंगे।
बीका वास्के, सहायक संचालक कृषि, रतलाम

पानी भरे खेत में 90 प्रतिशत तक नुकसान
जिन किसानों ने सोयाबीन खेतों में काट रखी है, उन्हे अनुमानित 40-50 प्रतिशत तक नुकसान होने के साथ ही पानी भरे खेतों में 80-90 प्रतिशत नुकसान का अनुमान है। सहायक संचालक कृषि बीका वास्के ने बताया कि अतिवृष्टि होने पर राजस्व विभाग एवं कृषि विभाग का अमला सर्वे कार्य में लगा है, सोमवार को राजस्व पटवारी के साथ कृषि अमले में सैलाना, धामनोद, बोदिना, भैंसाडाबर, करिया आदि क्षेत्रों का दौरा किया। कई क्षेत्रों में दागी और सडऩ के साथ ही सोयाबीन अंकुरित होने के मामले भी सामने आ रहे हैं।

कृषि विभाग की किसानों को सलाह
उप संचालक कृषि विजय चौरसिया ने बताया कि लगातार बारिश से सोयाबीन की गुणवत्ता में कमी आ सकती है, फलियों के दाने अंकुरित होने की संभावना हो सकती है। इसलिए किसान कटाई से सोयाबीन जो शेष बची है, सूखने के बाद ही थ्रेसर से निकाले, गहाई ३५०-४०० आरपीएम पर करें, जिससे दाने टूटे नहीं बीज उत्पादन के लिए सुरक्षित रखा जा सके। सोयाबीन फर्स पर सूखाने के बाद बोरी में भरकर मंडी में ला जाने से उचित दाम प्राप्त कर सकें।