
रतलाम। टाट और पल्लियों से पोलोग्राउंड सामने खुले मैदान में एक झोपड़ीनुमा अंधियारे में डूबा आशियाना है। इस झोपड़ी में रहने वाला परिवार कचरा बिनकर अपना जीवन बसर कर रहे है, लेकिन बच्चियों में पढ़ाई को लेकर ऐसा जुनून है कि मजबूरियों को भूलकर फटे-पुराने कपड़ों को ओढ़कर सर्द बयारों में स्ट्रीट लाइट की रोशनी में अक्षर ज्ञान लेती है। इनका जब ठंड में ठिठुरता हुआ फोटो वायरल हुआ तो राधा-रुक्मा की मदद को कोमल हाथ मदद को आगे आए। पत्रिका के साथ मिलकर कांग्रेस नेता ने चार्जिंग लाइट बच्चियों को दी।
स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ाई
झोपड़ी में अंधियारा होने के कारण सभी बच्चियों को स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ाई करनी पड़ती है। सोशल मीडिया पर इनका ये मार्मिक फोटो जब वायरल हुआ तो जरुरतमंदों ने मदद के लिए कदम बढ़ाए। कांग्रेस नेता व समाजसेवी कोमल धु्रर्वे ने इन बच्चियों की मदद के लिए सनलाइट से चार्ज होने वाली लाइट देने की ठानी। पत्रिका के साथ उन्होंने इनकी मदद के लिए मन बनाया और इनकी झोपड़ी पर पहुंचकर इन्हें लाइट दी।
दिन में स्कूल रात में काम
इन बहनों में रामकन्या तो सुबह कन्या उमावि में पढऩे जाती है। दिन में मां जो कचरा बिनकर लाती है, उसे छांटने में मदद करती है। रात का समय व्यर्थ नहीं जाए, इसलिए शादी-ब्याह में लाइट उठाने का काम भी करती है। मगर पढ़ाई के प्रति उसके जोश में कोई कमी नहीं आती है। राधा-रुक्मिणी, सोनू और भाई कमलेश भी पढऩे में खूब मन लगाते हैं। झोपड़ी में रहने को बराबर जगह नहीं है। वहीं हर रात अंधियारे में बिताने को मजबूर रहती है। गर्मी के मौसम में ज्यादा दिक्कत नहीं आती है, मगर बारिश और ठंड में परेशानी बढ़ जाती है। ठिठुरते हुए स्ट्रीट लाइट के नीचे पढऩे में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
दिन में स्कूल, रात में काम
पढ़ाई को लेकर इन बच्चियों में काफी उत्साह है। बगैर सुविधाओं के जीवन बिता रही इन बच्चियों का स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ते हुए फोटो सोशल मीडिया पर देखा था, मेरा छोटा सा प्रयास है कि इस लाइट से इन्हें थोड़ी मदद जरूर मिलेगी। - कोमल ध्रुर्वे, कांग्रेस नेता
Published on:
24 Nov 2017 11:52 am
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