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हाईवे के असुरक्षित चौराहें बन रहे हादसों का कारण

रतलाम-जावरा के बीच फोरलेन पर दौड़ रही मौत

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रतलाम. रतलाम-जावरा फोरलेन पर हादसे होना आम बात हो गई है। ३5 किमी के हाईवे के इस सफर पर लोगांे को 17 से अधिक डेंजर जोन से होकर गुजरना पड़ता है। फोरलेन बनने के बाद से अब तक यहां हुए हादसांे के बाद इन चौराहों पर सुरक्षा के इंतजाम विकसित करने के लिए जनआंदोलन से लेकर ज्ञापन हुए, इतना ही नहीं जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारी और प्रदेश सरकार की और से गठित समितियों ने तक यहां निरीक्षण किया, लेकिन खामियां अब भी यथावत है ।

आंदोलन-निरीक्षण भी दूर नहीं कर पाए खामियां
फोरलेन बनने के बाद शुरु हुए हादसों के बाद हर और से आवाज उठी। 2012 में शासन स्तर से विधायको की समिति ने पूरे फोरलेन का निरीक्षण किया और अनेक खामियां निकाली। इसके बाद से अब तक अनेक बाद जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों ने कई बार निरीक्षण कर खामियांे को उठाया तो हाईवे पर हुई मौतों के बाद अनेक बाद जनआंदोलन हुए, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिलें। सुरक्षा के इंतजामों से लेकर खामियों का दूर करने का काम अब तक नहीं हुआ और आज भी हाईवे पर डंेजर जोन लोगों की जिंदगी लील रहे है।

यह स्थान है डेंजर जोन
जावरा-रतलाम के बीच जावरा चौपाटी चौराहा, विश्रामगृह चौराहा, रतलामी नाका, लुहारी फंटा, बरगड़ फंटा, उमटपालिया, सोहनगढ़ फंटा, चौरासी बड़ायला, अरनिया गुर्जर, हसनपालिया बायपास चौराहा, बड़ौदा फंटा, नामली कृषि उपज उपमंडी चौराहा, नामली बायपास में आने वाले चौराहें, नामली ओवरब्रिज पांईट, इप्का चौराहा, सेजावता चौराहा, रतलाम बायपास चौराहा के साथ अन्य चौराहें एेसे है जहां आए दिन हादसें हो रहे है। रात के समय अधिक हादसों का खतरा रहता है। फोरलेन के इन डेंजर जोन चौराहों पर अनेक हादसें हो चुकी है और अनेक लोगांे की जानें भी जा चुकी है, फिर भी सुरक्षा के लिए यहां पर काम नहीं हो पाया है।

काफी काम हो चुका है
फोरलेन के चौराहांे के साथ जिन स्थानों पर सुरक्षा के इंतजाम की बात आई थी। उन स्थानों पर अधिकांश जगह सुरक्षा की दृष्टि से काम किया जा चुका है। चौराहों पर काफी काम हो चुका है। गाईड लाईन के अनुसार जितने काम होना थे, वह पूरे किए गए है। -आरके जैन, महाप्रबंधक, एमपीआरडीसी