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प्रदेश के इस जिले में मिला पन्यास प्रवर को आचार्य पद्, समोवसरण जय-जयकार से गूंज उठा

प्रदेश के इस जिले में मिला पन्यास प्रवर को आचार्य पद्, समोवसरण जय-जयकार से गूंज उठा

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प्रदेश के इस जिले में मिला पन्यास प्रवर को आचार्य पद्, समोवसरण जय-जयकार से गूंज उठा

रतलाम। पंन्यास प्रवर युगसुंदरविजय अब आचार्यश्री युगसुंदरसूरी महाराज कहलाएंगे। उन्हें रविवार को पद्मभूषण, सरस्वतीलब्धप्रसाद, आचार्य श्रीमद्विजय रत्नसुन्दर सूरीश्वर महाराज ने रूद्राक्ष कालोनी में आयोजित महोत्सव में आचार्य की पदवी प्रदान की। पंन्यास प्रवर युगसुंदरविजय महाराज को आचार्य पद प्रदान होते ही पूरा समोवसरण शुभम भव, श्रेयम भव, कल्याण भव और मंगल भव के स्वरों से गूंजायमान हो उठा। पद धारण करने से पहले आचार्यश्री की प्रदक्षिणा की। इसके साथ ही श्री देवसुर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ, गुजराती उपाश्रय एवं श्री ऋषभदेव केशरीमल जैन श्वेताम्बर पेढ़ी द्वारा आयोजित 8 दिवसीय आचार महिमा महोत्सव का भव्य समापन हो गया। इस दौरान आचार्य पदमसुंदर विजय, अनुयोगाचार्य, मालव विभूषित पंन्यास प्रवर वीररत्न विजय महाराज एवं साध्वीश्री संवेगनिधि सहित संत-साध्वी मंडल उपस्थित रहा।

आचार्यश्री ने विधि-विधान से सारी क्रियाएं संपन्न होने के बाद आचार्य के रूप में नूतन आचार्य का नामकरण किया। इससे पूर्व पन्यास प्रवर पदमबोधी विजय ने 700 श्लोकों वाले महामंगलकारी नंदी सूत्र का वाचन किया। आचार्यश्री ने नूतन आचार्य को सूरी मंत्र का पट और नवकारवाली भेंट की। मुनिश्री पाश्र्वसुंदर विजय द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन किया गया। नूतन आचार्य सहित समस्त आचार्यगण को कांबली ओढ़ाई गई। महोत्सव में मुंबई से आए अनिल गेमावत ने संगीतमय प्रस्तुतियों से समा बांध दिया। कार्यक्रम का संचालन चेन्नई से आए संघवी विपिन सतावत एवं रतलाम संघ के उपाध्यक्ष मुकेश जैन ने किया।

महोत्सव में बना अद्भुत दृश्य, धर्मलाभ के लिए लगी बोलियां
आचार महिमा महोत्सव में आचार्य पदवी का प्रसंग देखने देश भर से धर्मानुरागी जुटे। आचार्य पदवी प्रदान करने के बाद महोत्सव में ऐसा अद्भुत प्रसंग भी आया, जिसमें पदवी प्रदान करने वाले आचार्यश्री ने नूतन आचार्य को अपने पाट पर बिठाया और पूरे शिष्य मंडल के साथ उन्हें नमस्कार कर शासन व्यवस्था का संदेश दिया। महोत्सव में मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता जैसे महानगरों सहित कई स्थानों से आए गुरूभक्तों ने बोलियां लगाकर धर्मभक्ति का लाभ लिया। सबसे पहले सूरी मंत्र की बोली लगी, जिसका लाभ मुंबई के अवनि राजीव भाई शाह परिवार ने लिया। नवकारवाली की बोली का लाभ सुधाबेन भाईलाल, रतिलाल परिवार ने दीपक भाई के हस्ते लिया। पहले गुरूपूजन की बोली का लाभ हिम्मतभाई, उद्धवभाई गांधी पालीताणा वाला परिवार ने लिया। कांबली ओढ़ाने का लाभ चेन्नई के शांतिबाई रखबचंद राठौर परिवार ने लिया। नूतन आचार्य की सबसे पहले पगलि, कराने की बोली का लाभ रतलाम के चांदबाई वागमल गादिया परिवार ने लिया। महोत्सव में पद्मभूषण आचार्य श्रीमद्विजय रत्नसुन्दर सूरीश्वरजी महाराज ने सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में मदद के लिए प्रति जीव रक्षा 5 हजार रुपए का आव्हान किया, जिसपर गुरूभक्तों द्वारा देखते ही देखते सैंकड़ों जीवों की रक्षा के लिए घोषणाएं की गई। इस दौरान श्री संघ अध्यक्ष सुनील ललवानी सहित रतलाम संघ के पदाधिकारीगण एवं श्रावक.श्राविकागण उपस्थित थे।

मंगलवार को टीआईटी रोड़ श्रीसंघ में प्रवेश
आचार्यश्रीमद्विजय रत्नसुन्दर सूरीश्वर महाराज का मंगलवार 30 अप्रैल को सुबह टीआईटी रोड श्री संघ में मंगल प्रवेश होगा। टीआईटी रोड़ श्री संघ के मुकेश जैन ने बताया कि मंगल प्रवेश का जुलुस सुबह 6.15 बजे बैंक कालोनी स्थित अशोक कुमार, मुकेश कुमार बम्बोरी के निवास से प्रारंभ होगा, जो स्टेशन रोड़ स्थित जैन मंदिर होते हुए टीआईटी रोड स्थित श्री पाश्र्वनाथ जैन धर्मशाला पहुंचेगा। सुबह 7 से 8 बजे नवकारसी के बाद धर्मशाला में सुबह 8.30 से 9.30 बजे तक प्रवचन होंगे।