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भारत राष्ट्र ऋषि पंरपराओं का राष्ट्र

रतलाम। मनुष्य जीवन के लिए धर्म का आचरण श्रेष्ठ माना है । संस्कार संस्कृति ही राष्ट्र को महान बनाती है । भारत राष्ट्र ऋषि पंरपराओं का राष्ट्र है इसलिए मानव मात्र को मर्यादा का पालन करना आवश्यक है। संस्कारवान व्यक्ति हमेशा अपनी मर्यादा में रहते है।

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यह विचार भागवताचार्य पं. योगेश्वर शास्त्री ने श्री मेढ़ क्षत्रिय मारवाड़ी स्वर्णकार समाज की ओर से पुरुषोत्तम मास में आयोजित संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में कही। श्रीशेषनारायण मंदिर भरावा की कुई पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम के अवसर पर कथा आयोजन समिति की ओर से भागवताचार्य योगेश्वर शास्त्री का श्री मेढ़ क्षत्रिय मारवाड़ी स्वर्णकार समाज की ओर से शाल श्रीफल एवं माला पहनाकर सम्मान किया। इसके साथ ही यजमान कृष्णादेवी-प्रदीप वर्मा व संगीतकारों का समाज की ओर से शाल श्रीफल माला पहनाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया। संस्थापक अध्यक्ष नवनीत सोनी ने आयोजन के लिए आभार माना।

निकला पौथी चल समारोह

कथा विश्राम पर पोथी को शोभायात्रा के रूप में बैंड-बाजों के साथ जिसमें पं. शास्त्री को बग्गी में बैठाकर श्रीलक्ष्मीजी मंदिर श्रीमाली वास तक ले गए, जिसमें जयदीप भामा, संजय अग्रोहा, जगदीश भामा, संजय अग्रोया, राजकुमार बेवाल, शैलेष जलोतिया, गंगाधर जांगलवा, रमेश सोनी, संजय सोलीवाल, मुकेश जलोदिया, राजेश भामा, मोतीलाल मींडिया, मुकेश अग्रोया, तेजकरण सोलीवाल, भुपेन्द्र मंडावरा, श्यामसुंदर सदेवड़ा, राजेन्द्र अग्रोया आदि न्यास पदाधिकारियों एवं सदस्यगण, समाजजन सहित बड़ी संख्या में धर्मालुजन उपस्थित थे ।