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दंड की घोषणा के 8 दिन बाद रेलवे का U Turn

रतलाम। रेलवे ने 8 दिन पूर्व लगेज के मामले में लिए गए अपने उस निर्णय को वापस ले लिया है, जिसमे तय नियम से अधिक सामान ले जाने वाले यात्रियों पर जुर्माने की बात कही गई थी। रेलवे ने यूटर्न लेते हुए अब कहा है कि हमारा उद्देश्य तो यात्रियों को जागरुक करना था। फिलहाह 8 जून से 22 जून तक चलने वाले अभियान को वापस ले लिया गया है।

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रेलवे ने 1 जून को घोषणा की थी कि ट्रेन में तय नियम से अधिक वजन का सामान होने पर यात्री से जुर्माना वसूला जाएगा। अब रेलवे ने जुर्माना वसूलने की योजना को फिलहाल वापस ले लिया है। अचानक यूटर्न लेते हुए रेलवे का कहना है कि वो सिर्फ यात्रियों को इस बात के लिए जागरुक करना चाहती है कि अधिक वजन से अन्य यात्रियों को समस्या होती है। कई बार ट्रेन में इससे विवाद होते है व यात्रियों में मारपीट की नौबत आती है।

छह गूना जुर्माना की बात बोली थी

मंडल में रेलवे ने अधिकृत बयान जारी करते हुए 8 जून से 22 जून तक अभियान चलाने की बात कही थी। इसके बाद कहा गया था कि छह गूना दंड अधिक लगेज होने पर वसूला जाएगा। इसमे शयनयान में 40, सामान्य में 35, प्रथम श्रेणी वातानुकूलित में 70 व द्वितीय श्रेणीवातानुकूलित में 50 किलो तक वजन ले जाने की अनुमती रहती है। इससे अधिक लगेज पाए जाने पर 6 गूना जुर्माना वसूलने का बयान जारी हुआ था।रेलवे की इस घोषणा से मंडल में बड़ा लाभ होगा। असल में अनेक यात्री एेसे है जो मुबई व दिल्ली के रास्ते रतलाम विदेश से कार्य करके आते है। इनके साथ रेलवे द्वारा तय नियम से अधिक लगेज रहता है। इसके अलावा जो वीआईपी आते हैं, उनके पास भी ये लगेज का वजन रेलवे के नियम से कही अधिक ही रहता है। एेसे में जब रेलवे को अपनी गल्ती का एहसास हुआ तो उसने इस अभियान पर यूटर्न ले लिया।

एेसे होता जुर्माना

अगर आप ट्रेन से 500 किमी तक के सफर में 80 किलो सामान ले जाना चाहते तो आपको 109 रुपए का भुगतान करना पड़ता है, लेकिन अगर आप इस रकम का भुगतान किए बिना ही इसे ट्रेन में ले जाते तो रेलवे आपसे 654 रुपए का जुर्माना वसूलती। अब ये नहीं लगेगा।

वरिष्ठ कार्यालय से निरस्त हुआ

ये आदेश वरिष्ठ कार्यालय से निरस्त हुआ है। हमारा उद्देश्य भय पैदा करना नहीं, बल्कि यात्रियों को जागरुक करना है। यात्री अपनी जिम्मेदारी स्वयं भी समझे।

- जेके जयंत, जनसंपर्क अधिकारी, रतलाम रेल मंडल