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Ratlam News : डेमू ट्रेन के महिला से लेकर दिव्याग कोच में यात्रा कर रहे आमयात्री

डेमू के दिव्यांग कोच में आम यात्री कर रहे यात्रा, चलती ट्रेन में आए दिन हो रहे विवाद, आरपीएफ से लेकर जीआरपी नदारत

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indore ratlam demu train

indore ratlam demu train

रतलाम। डेमू व मेमू सहित सभी यात्री ट्रेनों में महिला और दिव्यांग यात्रियों के लिए अलग से कोच आरक्षित किए गए हैं, लेकिन कई बार महिलाओं के कोच में पुरुष यात्री सीटों पर कब्जा कर लेते हैं। विरोध करने पर वाद-विवाद करते हैं। पूरे मामले का लब्बोलुआब ये कि इस गलत बात को रोकने की जिम्मेदारी आरपीएफ जीआरपी की है, लेकिन दोनों ही प्लेटफॉर्म से नदारत है।

इंदौर से रतलाम व मंदसौर - नीमच होते हुए चित्तौडग़ढ़ तक के बीच चलने वाली डेमू ट्रेन में भी महिला और दिव्यांग यात्रियों के लिए अलग से कोच आरक्षित किया गया है, लेकिन यहां भी पुरुष यात्री घुस जाते है, जबकि कोच के बाहर महिला और दिव्यांग यात्री की सूचना लगी है। महू - रतलाम डेमू ट्रेन शनिवार दोपहर प्लेटफार्म-1 पर पहुंची। यात्रियों ने यह भी नहीं देखा कि कोच महिला और दिव्यांगों के लिए आरक्षित है। महिलाओं के साथ वे भी कतार में लगकर चढ़ते नजर आए। ये ही नजारा ट्रेन के रतलाम पहुंचने पर दिव्यांग डिब्बे का था। दिव्यांग व महिलाओं के लिए आरक्षति कोच में सामान्य व पुरुष यात्रियों का कब्जा रहता है।

अपराध की श्रेणी में आता

महिला कोच में पुरुष यात्रियों का सफर करना अपराध की श्रेणी में आता है। आरपीएफ ने पूर्व में कार्रवाई की थी, लेकिन रतलाम स्टेशन पर आरपीएफ इन कोच की अब जांच तक नहीं करती है। शनिवार को प्लेटफार्म-1 पर डेमू ट्रेन खड़ी थी। पास में ही आरपीएफ थाना है, लेकिन यहां कोई भी सिपाही नहीं था। रेलवे एक्ट के मुताबिक महिला कोच में यात्रा करने पर पुरुष यात्री पर रेलवे एक्ट की धारा 162 और दिव्यांग कोच में सामान्य यात्रियों के सफर करने पर 155 के तहत कार्रवाई की जाती है। इसमें आर्थिक जुर्माना से लेकर जेल तक की सजा का प्रावधान है।

ट्वीट पर एक्शन तक नहीं

महिला यात्रियों के अनुसार उनका पूरा ग्रुप अपडाउनर्स है। कई बार नीमच से रतलाम आते समय पुरुष यात्री महिलाओं के डिब्बे में आ जाते है। विरोध करने पर विवाद करते है। ट्वीट करने पर भी कार्रवाई नहीं होती है। इतना ही नहीं, रतलाम में तो डेमू ट्रेन जिस प्लेटफॉर्म पर आती है, उसके करीब ही आरपीएफ थाना व उसी प्लेटफॉर्म पर जीआरपी थाना है, लेकिन ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर आते ही जवान नदारत हो जाते है। ऐसे में महिला यात्रियों व दिव्यांग को परेशानी का सामना करना होता है।