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जगह-जगह समाजजन की ओर से प्रभु एवं गुरु भगवंत की गवली की गई। दीक्षार्थी रत्नविधिकुमारी अपने दोनों हाथों से वर्षीदान कर रही थी। जुलूस हनुमान रुंडी, चांदनी चौक, बजाजखाना, गणेश देवरी, रानीजी का मंदिर, नाहरपुरा, डालूमोदी बाजार, दौलत गंज, घासबाजार, चौमुखीपुल होते हुए वापस हनुमान रुंडी पहुंचकर धर्म सभा में परिवर्तित हुआ। जहां पर गणिवर्य कल्याणरत्न विजय महाराज ने कहा कि सभी तरह की इच्छाओं को समाप्त करने को ही दीक्षा कहते हैं। बड़ी मुश्किल से प्राप्त मनुष्य भव में विरती के मार्ग पर आगे बढ़ने से ही मोक्ष मार्ग को प्राप्त किया जा सकता है।
महाराष्ट्र का घंटनाद गूंजता रहा
सबसे आगे बांसुरी वादक एवं शहनाई वादक चल रहे थे। उसके पीछे इंद्र ध्वजा फहरा रही थी। सुसज्जित हाथी एवं पांच घोड़े व ऊंट पर धर्मपताका लेकर समाज के युवजन शामिल हुए। इसके पीछे सुसज्जित बग्घियों में गच्छाधिपति रामचंद्र सूरीश्वर महाराज एवं आचार्य भगवंत तपोरत्न सूरीश्वर महाराज की तस्वीर शोभायमान थी। जुलूस में आकर्षण का केंद्र पुणे महाराष्ट्र से आए 20 सदस्यीय दल की ओर से किया जा रहा घंटनाद रास्ते भर गुंजायमान हो रहा था। नासिक से बुलाए गए ढोल का दस सदस्यीय दल भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
दीक्षार्थी का किया बहुमान
इस अवसर पर आराधना भवन ट्रस्ट बोर्ड अध्यक्ष अशोक लुनिया, उपाध्यक्ष पप्पू मुंबई वाला, सचिव हिम्मत गेलड़ा, सहसचिव राजेश गांधी एवं ट्रस्टी विजय मेहता ने दीक्षार्थी का श्रीसंघ की ओर से अभिनंदन पत्र व शाल, श्रीफल, रजत मुद्रिका से बहुमान किया। आराधना भवन सेवा समिति की ओर से संरक्षक मुकेश गांधी, अध्यक्ष जयंतीलाल कटारिया, सचिव नरेंद्र घीवाला, सुनील पारख, अभय सुराणा, सुजान रांका आदि ने भी बहुमान किया। 6 दिसंबर सुबह 7.15 से हनुमान रुंडी पर दीक्षा विधि शुरू होगी। दीक्षा महोत्सव में प्रवचन परिवार के देश भर से भक्तजन रतलाम पहुंच रहे हैं।
Published on:
05 Dec 2023 10:31 pm
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