
मानवता का गुण सारी महानताओं को कर लेता हैं आकर्षित
रतलाम. फूल यह नहीं कहता कि मैं सुगंधित हूं, लेकिन हवा उसकी सुगंध को फैलाती है। ऐसे ही मनुष्य की योग्यता, विनम्रता, सेवा भावना, उदारता उसके गुणों को समाज और राष्ट्र में प्रचारित कर देते है। गुणों की पूजा जहां होती है, वहां दुर्बलता को कभी प्रश्रय नहीं मिलता। गुणी सर्वत्र पूजा व प्रतिष्ठा को प्राप्त करते है। स्वयं के लिए तो संसार में सभी जीते है, लेकिन ऐसे गुणी व्यक्ति विरले होते है, जो मानवता के लिए जीते हो। मानवता का गुण, ऐसा गुण है, जो सारी महानताओं को अपनी और आकर्षित कर लेता हैं। मानवता के अभाव में महानता कोई परिकल्पना नहीं की जा सकती।
यह बात शांत क्रांति संघ के नायक, जिनशासन गौरव प्रज्ञानिधि आचार्य प्रवर विजयराजजी महाराज ने कही। सिलावटो का वास स्थित नवकार भवन में विराजित आचार्यश्री ने धर्मानुरागियों को प्रसारित संदेश में कहा कि हर कौम और मजहब में पैदा होने वाले गुणी का सम्मान उसके गुणों द्वारा हमेशा होता है। संसार में जैसे वैभव शालियों का सम्मान होता है, वैसे ही त्यागी-तपस्वियों का भी सम्मान होता है। सत्ता और समृद्धि जीते-जी सम्मान दिलाती है, तो त्याग और तप मरणोपरांत भी सम्मान दिलाते है। दोनों में एक बडा अंतर यह है कि एक सम्मान में स्वार्थ की दुर्गन्ध होती है, वहीं दूसरे सम्मान में नि:स्वार्थ श्रद्धा की गहरी सुगंध होती है। सम्मान तो दोनो पाते है लेकिन उसकी गुणवत्ता में अंतर होता है। व्यक्ति जब तक सत्ता सीन है, किसी पद पर है, वह काफ ी सम्मान पाता है लेकिन जब कुर्सी से उतर जाता है, तो सारा सम्मान बदल जाता है। कल तक जो लोग उसके आगे-पीछे घूमते और चक्कर काटते नजर आते है, वे पद से उतरते ही किसी और को ढूंढने लग जाते है। यह इसलिए होता है कि वह कुर्सी का सम्मान है, व्यक्ति या व्यक्तित्व का नहीं है।
सम्मान में श्रद्धा झुकती है
आचार्यश्री ने कहा कि त्यागी-तपस्वियों के सम्मान में श्रद्धा झुकती है। इस सत्य को समझ लेना आज की आवश्यकता है। कोरोना के इस संकटकाल में हर व्यक्ति अपने व्यक्तित्व की गुणवत्ता बढ़ाए। मात्र सत्ता, संपत्ति और सियासत को सबकुछ नहीं मानना चाहिए। कोई भी व्यक्ति आकर्षक और सुन्दर पहनावे से प्रभावी व्यक्तित्व का धनी नहीं होता। सुंदर जीवन शैली ही व्यक्तित्व को प्रभावी बनाती है। सुंदर जीवन शैली अच्छे व्यवहार और भले स्वभाव से निर्मित होती है। उन्होंने कहा कि गौरा रंग दो दिन अच्छा लगता है और ज्यादा धन दो माह अच्छा लगेगा, लेकिन अच्छा व्यवहार और स्वभाव जीवन भर अच्छा लगता है। प्रभावी व्यक्तित्व हर व्यक्ति के भीतर छुपा रहता है। इसे अपने भीतर से उजागर करना होता है। दुनिया के हर पत्थर में एक बेमिसाल प्रतिमा छिपी रहती है।
मानवता को बचाना सबसे बड़ा सत्कर्म
आचार्य ने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में मानवता का जितना हास हुआ है, उतना किसी और का नहीं हुआ है। मानवता को बचाना सबसे बडा सत्कर्म है। यह बचेगी, तो जगत और जीवन सुरक्षित रहेगा। वरना भविष्य के अंधकारमय बनते देर नहीं लगेगी। मानवता के मजबूत पांव ही गिरावट से बचा सकते है। अन्यथा फिसले और फिसलते गए, तो ढलान में पांव थमने कठिन हो जाएंगे।
Published on:
20 May 2020 05:42 pm
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