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#Ratlam: शीतल रात में रोशन हुआ जैन धर्मस्थल शीतलतीर्थ

रतलाम। बांसवाड़ा रोड स्थित दिगंबर जैन धर्मस्थल शीतलतीर्थ में पंचकल्याणक के बाद मंगलवार से महामस्ताअभिषेक महोत्सव शुरुआत हुई। तीर्थ में की गई शीतल रात्रि के दौरान 72 जिनालयों पर आकर्षक विद्युत सज्जा मनमोह रही थी। सुबह भगवान आदिनाथ का पंचामृत अभिषेक प्रतिष्ठाचार्य वृषभ सेन सांगली वालों ने करवाया।

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इस मौके पर आचार्य सुंदरसागर महाराज ने श्रद्धालुओं से कहा कि व्यक्ति के कल्याण के लिए उसे देह से मोह छोडऩा चाहिए, उससे उसका उद्धार होगा। योगेंद्र सागर महाराज की कृपा से तीर्थ पर सारे महोत्सव बगैर किसी बाधा के संपन्न हुए। इससे पूर्व प्रात: आचार्य विशुद्ध सागर महाराज इंदौर के लिए विहार हुआ। नागरिकों ने उन्हें जयकारा करते हुए आगे की यात्रा पर विदाई दी। राहुल पंजाबी, तीर्थ अधिष्ठात्री डॉक्टर सविता तिवारी ने बताया कि बुधवार को भी महमस्ताभिषेक के बाद महोत्सव का समापन होगा।

आचार्यश्री विशुद्ध सागर महाराज का ससंघ रतलाम पहुंचे

आचार्यश्री विशुद्ध सागर महाराज का ससंघ मंगलवार सुबह शहर में मंगल प्रवेश हुआ। शुरुआत में आचार्यश्री ने कस्तूरबा नगर आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दर्शन किए, इसके बाद ससंघ सैलाना बस स्टैंड पहुंचे। जहां दिगंबर जैन श्रावक संघ ने चर्या शिरोमणि आचार्यश्री की अगवानी कर पाद प्रक्षाल कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद पूरा संघ महाराष्ट्र समाज भवन पहुंचा। जहां जिले और बाहर से आए धर्मावलंबियों ने आचार्यश्री को श्रीफल भेंट कर उनसे आशीष लिया।

सुख वहां है जहां प्रीति है प्रेम है


आचार्यश्री ने प्रवचन में कहा कि सुख वहां है जहां प्रीति है प्रेम है। सुखे पौधे भी प्रीति से हरियाते हैं तो सूखे मनुष्य भी प्रीति से क्यों नहीं हर्षाएंगे। अत: प्रीति बनाए रखिए। आचार्यश्री ने उपस्थित समाजजनों से कहा कि दुनिया की प्रत्येक वस्तु को प्रीति से देखो राग से नहीं। अत: सुख वही है जहां प्रीति है। इस अवसर पर चंद्र प्रभु दिगंबर जैन श्रावक संघ के सभी पदाधिकारी सहित दिगंबर जैन समाज के समाजजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। दोपहर बाद आचार्यश्री ने ससंघ इंदौर के लिए विहार किया।