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जैन संत ने व्यापार में सफलता को लेकर कहीं यह बड़ी बात

रतलाम। आचार्य प्रवरश्री विजयराज महाराज ने मंगलवार को छोटू भाई की बगीची में प्रवचन के दौरान बताया कि व्यापार में कैसे सफलती मिलती है। इस पर उन्होने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं से कहा कि जो व्यापार न्याय से और नीति से चलता है, वही सफल होता है। व्यापार में धेर्य सबसे बड़ा गुण होता है।

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आचार्यश्री ने कहा कि यदि कोई जल्दबाजी करता है, तो असफल हो जाता है, लेकिन धेर्यपूर्वक लगन से मेहनत करता है, तो सफलता अवश्य मिलती है। व्यापार की असली पूंजी तो धेर्य है, माधुर्य है, अवसरवादिता और मिलनसारिता है। इनके बिना कोई कभी किसी व्यापार में सफल नहीं हो सकता। सांसारी लोग धन को ही पूंजी मानते है, लेकिन व्यापार में केवल धन ही पूंजी नहीं होता।

तो दूसरी बार ग्राहक नहीं आते


आचार्यश्री ने कहा कि व्यापार में माधुर्य का बड़ा प्रभाव पड़ता है। यदि व्यक्ति मधुर व्यवहार नहीं करता, तो ग्राहक दूसरी बार नहीं आते। इसी प्रकार अवसर का लाभ उठाना और मिलनसारिता रखना भी अच्छे व्यापार की निशानी है। व्यापार भौतिक और आध्यात्म जगत दोनो में होते है। इनमें सफलता के लिए चारो गुणों का होना आवश्यक है। शुरुआत में सेवानिष्ठ अनुपम मुनि महाराज ने संबोधित किया। इस मौके पर इंदौर के गांधीनगर श्रीसंघ से मंत्री गजराज बेताला ने विनंती की। उनके साथ संघ सदस्यों ने भी विनती की। प्रवचन में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकागण मौजूद रहे।

शत्रुंजय तीर्थ भाव यात्रा 27 को


आचार्यश्री विजय कुलबोधि सूरीश्वर महाराज आदि श्रमण-श्रमणीवृंद का चातुर्मास परिवर्तन एवं श्री शत्रुंजय तीर्थ की भाव यात्रा का आयोजन जैन कॉलोनी में 27 नवंबर को होगा। जैन कॉलोनी श्रीसंघ की ओर से आयोजित कार्यक्रम के अन्तर्गत सुबह 6.30 बजे सेठजी का बाजार से गाजे-बाजे के साथ प्रस्थान होगा। 7 बजे श्री शत्रुंजय तीर्थ की भावयात्रा के बाद नवकारसी का आयोजन होगा। इसके पूर्व आचार्यश्री विजय कुलबोधि सूरीश्वर महाराज के दो दिवसीय प्रवचन कार्यक्रम बालाजी नगर भगतपुरी संत नगर में 24 व 25 नवंबर को सुबह 9 से १०.१५ बजे तक आयोजित होंगे। प्रथम दिन के प्रवचन यात्रा गति से दिशा की ओर और दूसरे दिन यात्रा शुद्धि से सिद्धी की ओर विषय पर प्रवचन होंगे।