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रतलाम। हर मनुष्य में अनेक प्रकार की शक्तियां होती हैं। जन्म लेते ही मनुष्य देव, दानव या देव गण का होता है। भारतीय ज्योतिष में मनुष्य को इन तीन प्रकार के गण से ही जाना जाता है। किसी भी व्यक्ति के व्यवहार, आचरण के साथ चरित्र को गण में बांटा गया है। जो जैसा गण का होता है, वो उसी अनुसार पूरी जिंदगी व्यवहार करता है। ये बात रतलाम की प्रसिद्ध ज्योतिषी योगश्री श्रेया जैन ने कही। वे मनुष्य का गण व चरित्र के बारे में बता रही थी।
योगश्री जैन ने बताया कि देवता के समान व्यवहार वाले लोग देवगण में पैदा होते है। साधारण मनुष्य के समान गुणों वाले लोग मनुष्यगण में पैदा होते है। और राक्षसों के समान गुणों वाले लोग राक्षसगण में पैदा होते है। एेसे में किसी भी मनुष्य के व्यवहार से ये जानना काफी आसान है कि वो कितना वफादार है। देव गण के लोग सीधे, सच्चे व चरित्र में मजबूत होते है। जबकि मानव गण के लोग सुविधा अनुसार जीवन को जीते है। इसके विपरित दानव या राक्षस गण के लोग सिर्फ अपने स्वार्थ के अनुसार जीवन में आनंद की तलाश करते है।
यहां जाने गण अनुसार चरित्र
देवगण - देवगण में पैदा होने वाले लोग तेज दिमाग वाले और दयावान होते है। इस गण में पैदा होने वाले लोग दयावान, बुद्धिमान और दिलवाले होते है। इनका दिमाग कंप्यूटर की तरह चलता है। और अपने दिमाग से ही यह जीवन में उच्च सफलता प्राप्त करते है। अश्विनी,अनुराधा, श्रावण, मृगशिरा, पुष्य, हस्त, स्वाति,पुर्नवासु, रेवती नक्षत्र के समय में जन्म लेने वाला व्यक्ति देवगण का व्यक्ति होता है।
यहां जाने गण अनुसार चरित्र
मनुष्यगण - मनुष्यगण में पैदा होने वाले लोगों के सामान्य मनुष्य की तरह गुण होते है। ऐसे लोग जीवन में आने वाले दुख-दर्द और समस्याओं से घबरा जाते है। और उनका सामना नहीं कर पाते है। इसके अलावा इनकी आंखें बड़ी होती है। और इनमें दूसरों को वश में करने की ताकत होती है। फाल्गुनी, उत्तर फाल्गुनी, भरणी, रोहिणी, उत्तर षाढा, आर्दा, पूर्वा पूर्व षाढ़ा, पूर्व भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद के समय में जन्म लेने वाला व्यक्ति मनुष्यगण के अंतर्गत आता है।
यहां जाने गण अनुसार चरित्र
राक्षसगण - राक्षसगण में पैदा होने वाले लोग भयंकर, डरावने, गुस्से वाले होते है। ऐसे लोगों के लिए लड़ाई-झगड़ा करना आम बात होती है। लेकिन इनकी अच्छाई यह है कि ये किसी भी परिस्थिति में डर कर भागते नहीं है। और डटकर सामना करते है। कृत्तिका, धनिष्ठा, चित्रा, मघा, अश्लेषा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा नक्षत्र के समय जन्म लेने वाला व्यक्ति राक्षसगण के अंतर्गत आता है।
Published on:
17 Aug 2018 09:09 am
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