रतलाम। गांव-गांव फैली झोलाछाप डॉक्टरों की इलाज की दुकानों को देखने वाला कोई नहीं है। गांवों में इन लोगों ने अपनी दुकान इतनी जमा ली है कि एक एमबीबीएस डॉक्टर के नर्सिंग होम जैसी आम मरीजों को भर्ती करने और इलाज करने की सुविधा भी शुरू कर रखी है। यही नहीं कुछ जनस्वास्थ्य रक्षक भी धड़ल्ले से मरीजों को अपने क्लिनिक पर भर्ती करके इलाज किए जा रहे हैं। कुछ बंगाली डॉक्टर तो स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों की शरण में ही अपनी दुकान चला रहे हैं। पत्रिका ने दूर आदिवासी अंचल के सरवन जैसे बड़े गांव में इसकी छानबीन की तो यहां बंगाली और बिना डिग्री के इलाज करते हुए ढेरों डॉक्टर गांव की लगभग हर गली में आसानी से क्लिनिक चलाते हुए दिखे।