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कानपुर ट्रेन हादसा: रतलाम में रेलवे गंभीरता से लेती ही नहीं धमकियों को

इंदौर- पटना ट्रेन हादसे में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ सामने आने के बाद एक बार फिर रतलाम रेल मंडल चर्चा में आ गया हैं। रेलवे राजधानी ट्रेन में यात्रियों से हुई लूट को नहीं सुलझा पाया हैं।

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vikram ahirwar

Jan 18, 2017

train accident

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रतलाम। इंदौर- पटना ट्रेन हादसे में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ सामने आने के बाद एक बार फिर रतलाम रेल मंडल चर्चा में आ गया हैं। यहां 2014 से अब तक करीब आधा दर्जन बार अलग-अलग स्तर पर कभी प्लेटफॉर्म तो कभी ट्रेन को उड़ाने की धमकियां मिली, लेकिन इनको कभी गंभीरता से लिया ही नहीं गया। असल में मंडल में आरपीएफ यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ लगाातर जारी हैं। रतलाम रेलवे अब तक एक वर्ष पूर्व राजधानी ट्रेन में यात्रियों से हुई लूट को नहीं सुलझा पाया हैं तो इनसे यात्रियों की सुरक्षा की उम्मीद करना अब बेमानी होगा।

भारत-नेपाल सीमा से गिरफ्तार मोती पासवान ने खुलासा किया हैं कि रेल दुर्घटना हादसा नहीं साजिश थी। असल में इस प्रकार की साजिशों को ट्रायल के रुप में धमकी देकर पहले टेस्ट किया गया कि रेल मंडल इनको कितनी गंभीरता से लेता है। इसके बाद ही इसको अंजाम तक पहुंचाया गया। मंडल मुख्यालय में कभी ट्रेन के अंदर 170 किलो गांजा रतलाम से चढ़कर सूरत तक पहुंच जाता है व यहां जीआरपी से लेकर आरपीएफ तक को कानोकान खबर तक नहीं होती है। हाल ही में यहां प्लेटफॉर्म से लेकर रेल परिसर तक के सीसीटीवी कैमरे तक अनुबंध समाप्त होने के बाद हटा दिए गए है। इससे ही पता चलता है कि रेलवे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कितना संजीदा है।

दिल्ली से लेकर मुंबई तक सिर्फ निर्देश

पांच से अधिक बार दिल्ली-रतलाम-मुंबई राजधानी ट्रेन को बम से उड़ाने की धमकी मिली। हर बार धमकी मिलने के बाद ट्रेन की दिल्ली, मथूरा, कोटा, रतलाम व बड़ोदरा आदि में जांच की गई। जांच के बाद जब कुछ नहीं मिला तो इसको फेक धमकी करार दिया गया। जबकि इसी ट्रेन में 2014 में बाद चोरी की घटना हुई, लेकिन पुलिस उन तक नहीं पहुंच पाई। इतना ही नहीं, नागदा-रतलाम सेक्शन में तो इस ट्रेन में यात्रियों से लूट तक हुई व जंजीर खींच कर आराम से लूट करने वाले उतर गए। तब से लेकर अब तक पुलिस के हाथ इस मामले में भी खाली है।

नवंबर में हुआ था हादसा

असल में 20 नवंबर की सुबह इंदौर-पटना ट्रेन की अनेक बोगियां पटरी से उतर गई थी। ट्रेन का ये हादसा कानपुर के करीब हुआ था। इसमे 145 यात्रियों की जान गई थी। ट्रेन में इंदौर, उज्जैन, रतलाम, देवास आदि क्षेत्र के यात्री भी सवार थे। इस ट्रेन हादसे के बाद ही रतलाम मंडल के मेघनगर - दाहोद सेक्शन में टूटी पटरी से 1500 यात्रियों को लेकर सर्वोदय ट्रेन निकल गई, जबकि कुछ देर बाद ही मेमू ट्रेन के चालक की टूट पटरी पर नजर पड़ी तो उसने आपात बे्रक का उपयोग किया।

मंडल में ये होता धमकी पर

2014 में रतलाम स्टेशन को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा के नाम पर आरपीएफ के दो जवान बढ़ा दिए गए, जबकि यहां स्टेशन के बाहर ही सिमी व एटीएस के बीच सीधी मुठभेड़ हो चुकी है। इतना ही नहीं, रतलाम को संवेदनशील जिलों में शामिल किया गया है। इसके बाद भी स्टेशन व ट्रैक पर पैंट्रोलिंग को गंभीरता से नहीं लिया जाता। इसके चलते ही ट्रैक पर तोडफ़ोड़ करना देश विरोधी लोगों के लिए आसान होता है।

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