
रतलाम. समीक्षा इस बात को इंगित करती है कि किसी विषय वस्तु पर लिखी गई। अपनी बात को कसौटी पर खरी उतारने जैसा है। उस संकलन में किताब में कहां कब किस वक्त कहा गया उस बात को आमजन तक पहुंचाना ही समीक्षा कहलाती है।
यह बात हरिशंकर भटनागर ने मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा संचालित पाठक मंच प्रथम इकाई द्वारा समीक्षा एवं काव्य गोष्ठी में व्यक्त किए। भवानी प्रसाद मिश्र द्वारा रचित पुस्तक कुछ नीति कुछ राजनीति की समीक्षा प्रकाश हेमावत, सतीश जोशी द्वारा की गई। समीक्षा में इस बात को बताया गया है कि वर्तमान हालात, राजनीति के हालातों, तमाम पहलुओं को उजागर करती हुई प्रतीत होती है। समीक्षा में यह भी दर्शाया गया कि आमजन राजनीति के इस माहौल में कैसा फंसा हुआ है। पूर्व में आमजन की हालत कैसी थी इस समय को इस समीक्षा में देखने को मिली। इस काव्य गोष्ठी में प्रकाश हेमावत ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अकरम शिरानी ने अपने गजल के माध्यम से उस माहौल पर अपनी बात कही जहां आम जन संघर्षों के बीच अपने जीवन को जी रहा है। जुझारसिंह भाटी ने दीपावली रचना के माध्यम से महंगाई पर तंज कसते हुए अपनी बात कही। देवेंद्र वाघेला, सतीश जोशी एवं यशपाल तंवर ने अपनी मालवी भाषा की मिठास खोलते हुए मालवी में अपनी रचना सुनाकर माहौल में माहौल को खुशनुमा बना दिया।
मौन शीर्षक से कविता
पंडित रश्मि पंडित ने मौन शीर्षक से कविता सुनाकर मौन की महिमा को उजागर किया। प्रकाश हेमावत ने छोटी-छोटी बातों को लेकर हास्य का माहौल बना कर अपनी उपस्थिति को दर्ज करवाई। रावटी से आए हरीश ठक्कर ने गजल में हिंदुस्तान की बात को गुनगुना कर माहौल में राष्ट्रीयता का रस घोल दिया। सुभाष यादव ने कौन बनेगा करोड़पति की तर्ज पर व्यंग्यात्मक कविता सुनाई। हरिशंकर भटनागर ने गीतों के माध्यम से श्रंगार वीर वेदना के प्रतीक से अपने गीत सुनाया। संचालन सतीश जोशी नगरा में किया एवं आभार सुभाष यादव ने किया। आयोजन पंडित जोशी के निवास स्थान पर दीप मिलन समारोह के रूप में किया गया।
Published on:
17 Nov 2021 06:02 am
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