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मेहंदीकुई बालाजी का बड़ा राज: लाल कपड़े और नारियल में होता है कुछ खास

मेहंदीकुई बालाजी का बड़ा राज: लाल कपड़े और नारियल में होता है कुछ खास

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मेहंदीकुई बालाजी का बड़ा राज: लाल कपड़े और नारियल में होता है कुछ खास

रतलाम. श्रीराम भक्त हनुमान साक्षात एवं जाग्रत देव हैं। हनुमानजी की भक्ति जितनी सरल है उतनी ही कठिन भी। कठिन इसलिए की इसमें व्यक्ति को उत्तम चरित्र और मंदिर में पवित्रता रखना जरूरी है।
हनुमानजी की भक्ति से चमत्कारिक रूप से संकट खत्म होकर भक्त को शांति और सुख प्राप्त होता है। विद्वान लोग कहते हैं कि जिसने एक बार हनुमानजी की भक्ति का रस चख लिया वह फिर जिंदगी में अपनी बाजी कभी हारता नहीं। जो उसे हार नजर आती है वह अंत में जीत में बदल जाती है। ऐसे भक्त का कोई शत्रु नहीं होता।
जी हां, हम भी हनुमान जी की भक्ति से जुड़े एक बड़े राज के बारे में आपको बता रहे हैं। रतलाम के प्रसिद्ध एवं प्राचीन श्री मेहंदीकुई बालाजी मंदिर की। इस मंदिर की प्राचीनता और प्रसिद्ध की से शहरवासी भली-भांति परिचित है। हनुमानजी की कृपा कई भक्तों को यहां मिली है। यहां कई भक्त अपनी मन्नत लेकर हनुमानजी के दर्शन को आते हैं।

लाल कपड़े और नारियल का राज
मेहंदीकुई बालाजी मंदिर वर्तमान में निर्माणाधीन है, क्षतिग्रस्त होने के बाद मंदिर का नवनिर्माण किया जा रहा है। इसलिए बालाजी की प्रतिमा उद्यान परिसर में स्थापित की गई है। परिसर में जाते ही मंदिर की दाहिनी और एक जाली पर लाल कपड़े में लपटे नारियल बंधे हुए नजर आते है। इनमें भक्तों की मन्नतें होती है, जो भक्त हनुमानजी से पूरी करने के लिए बांधकर जाते हैं।

हर मंगलवार भक्त जलाते हैं दीपक
मेहंदीकुई बालाजी मंदिर में हर मंगलवार हनुमानजी का आकर्षक और अद्भुत श्रंृगार किया जाता है। जैसे, सावन में बालाजी हनुमान शिव का रूप ले लेते हैं, तो गणेशोत्सव में भगवान गणेश का चौला ओढ़ लेते हैं। भक्त यहां दर्शन करने के साथ-साथ प्रार्थना के बाद दीपक भी जलाकर जाते हैं।

आपने हनुमानजी के बहुत से चित्र देखे होंगे।
जैसे. पहाड़ उठाए हनुमानजी, उड़ते हुए हनुमानजी, पंचमुखी हनुमानजी, रामभक्ति में रत हनुमानजी, छाती चिरते हुए, रावण की सभा में अपनी पूंछ के आसन पर बैठे हनुमानजी, लंका दहन करते हनुमान, सीता वाटिका में अंगुठी देते हनुमानजी, गदा से राक्षसों को मारते हनुमानजी, विशालरूप दिखाते हुए हनुमानजी, आशीर्वाद देते हनुमानजी, राम और लक्षमण को कंधे पर उठाते हुए हनुमानजी, रामायण पढ़ते हनुमानजी, सूर्य को निगलते हुए हनुमानजी, बाल हनुमानजी, समुद्र लांगते हुए हनुमानजी, श्रीराम.हनुमानजी मिलन, सुरसा के मुंह से सूक्ष्म रूप में निकलते हुए हनुमानजी, पत्थर पर श्रीराम नाम लिखते हनुमानजी, लेटे हुए हनुमानजी, खड़े हनुमानजी, शिव पर जल अर्पित करते हनुमानजी श्रीराम दरबार में नमस्कार मुद्रा में बैठे हनुमानजी आदि।