11 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

मां काली: यहां चांदी से बने हैं माता के मंदिर के द्वार, जानें किस परिवार ने की थी देवी मां की स्थापना

- रतलाम में है प्राचीन मां गढ़ कालिका की चमत्कारी मूर्ति

2 min read
Google source verification
maa_kali.jpg

रतलाम। प्राचीन मां गढ़ कालिका की चमत्कारी मूर्ति रतलाम में है। गर्भगृह में मां कालिका के साथ चामुण्डा व दक्षिणावर्ती सूंड वाले गणपति विराजित है। मंदिर के द्वार चांदी के बने हैं। श्रद्धालु कालिका माता मंदिर जाग्रत और पवित्र मानते हैं। सन् 1556 -1605 ई. में अकबर के समय में भी रतलाम इसी नाम से था।

आईना अकबरी के अनुसार उस समय रतलाम में लगभग 500 की जनसंख्या में सोढ़ी राजपूत परिवार राज करते थे। सोढ़ी परिवार ने माता पूजन के लिए कालिका देवी की स्थापना की थी। तब से अब तक माता की आराधना भव्य स्तर की जाती रही है।

मलेनी नदी के तट पर हिंगलाज विराजी: मलेनी नदी के तट पर प्राचीन शिव-शक्ति धाम के रूप में विद्यमान हैं। मां हिंगलाज यहां 64 योगनियों के साथ विराजी हैं। समीप ही शिव मंदिर में पाप और धर्म के खंबे हैं जिनमें से निकलकर लोग पापकर्मों से मुक्ति पाते है।

नगर से 34 किमी दूर ग्राम गुणावद से कुछ दूर मलेनी नदी के तट पर मां हिंगलाज टेकरी पर पर भगवान शिव के साथ दर्शन देती हैं। 14 खंबों से निर्मित मंदिर शिव भगवान विराजमान है। टेकरी पर पहुंचने के लिए 107 सीढ़ियां चढ़कर आना होती हैं।

इधर, शहर के पास तैयार हो रहे चार लोक:
वहीं दूसरी ओर भोपाल में इंदौर रोड पर फंदा के पास पिछले कुछ सालों से चार लोक का निर्माण किया जा रहा है। इसे पर्यटकों के लिए एक तीर्थक्षेत्र के रूप में तैयार किया जा रहा है। चार लोक में से शिव लोक का निर्माण कार्य 80 फीसदी तक पूरा हो गया है। इसके प्राण प्रतिष्ठा की तारीख भी तय कर दी गई है।

अगले वर्ष 26 जनवरी को इसकी विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी, इसके बाद शेष तीन लोक का निर्माण कार्य भी किया जाएगा। इसे मानसरोवर धाम का नाम दिया गया है। यह धार्मिक आस्था का केंद्र होगा। इस धाम में सबसे पहले शिवलोक का निर्माण कराया जा रहा हैं।

मानसरोवर सेवा समिति के अध्यक्ष संजय कश्यप ने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन 26 जनवरी से 3 फरवरी 2023 तक किया जाएगा। इसमें साधु संतों के साथ शंकराचार्य को भी आमंत्रित किया जा रहा है।

51 फीट की भोलेनाथ की पाषाण प्रतिमा
शिवलोक में 51 फीट की भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा स्थापित की जा रही है, जो पाषाण की प्रतिमा होगी। यह प्रतिमा 150 टन के पत्थर से निर्मित की जा रही है, जिसे ओडिशा से आए कारीगर आकार दे रहे हैं। मानसरोवर सेवा समिति के सदस्यों का दावा है कि भारत की यह पहली इतनी बड़ी पाषाण प्रतिमा है।

शिवलोक में कैलाश पर्वत भी बनाया जा रहा है। इसकी लंबी 120 फीट होगी और ऊंचाई 63 फीट रहेगी। इसके अंदर 12 ज्योर्तिलिंग बनाए जा रहे हैं। इसमें शंकर की जटाओं से गंगा की धारा बहेगी, वह अपने आप में मनमोहक होगी। इसी प्रकार यहां एक कुंड रहेगा जिसमें गोमुख से जल गिरता रहेगा और महामृत्युंजय जाप होता रहेगा।

एक हजारी महादेव : यहां 11 फीट का एक शिवलिंग भी बनाया जा रहा है। इसके अंदर छोटे-छोटे 1008 शिवलिंग बनाए जा रहे हैं। इसे हजारी महादेव का नाम दिया गया है। शिवलिंग के सामने 5.5 फीट के नंदी भगवान शिव की पहरेदारी करेंगे।