
महामांगलिक सुनने सहारा लेकर पहुंची युवती, श्रवण के बाद स्वयं चलकर गई
रतलाम। मध्यप्रदेश के जावरा कस्बे में पहली बार एक नहीं अनेक चमत्कार देखे गए, जब राष्ट्रसंत, कृष्णगिरी शक्ति पीठाधिपति डॉ. वसंत विजय मसा ने अपनी सिद्ध बीज मंत्रों युक्त दिव्य महामांगलिक प्रदान की।
इस दौरान अनेक लोगों को देव दर्शन हुए एवं शरीर में कंपन हुआ। विभिन्न प्रकार के रंग दिखे तो एक कन्या व एक महिला के सिर पर केसर की वर्षा हुई, वहीं एक बालिका जो चलने में असमर्थ थी, किसी सहारे से आयोजन स्थल पर पहुंची व कुर्सी पर बैठकर महामांगलिक श्रवण की ओर इसके पश्चात वह स्वयं ही चलने लगी। जावरा के खाचरौद रोड स्थित श्री राज राजेंद्र वाटिका में रविवार को बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं को विभिन्न मुद्राओं, क्रियाओं व कवच सूत्रों के साथ प्रभु पाश्र्वनाथ के 1008 नामों के साथ महामांगलिक दी। साथ ही मंत्र नाम की शक्ति का एहसास कराया। इससे पूर्व पाश्र्व प्रभु के दीक्षा कल्याणक अवसर पर दीक्षा मय मंत्रों के साथ राष्ट्रसंत ने अपने अलौकिक प्रवचन में कहा कि मणि, मंत्र और औषधि निमित्त बनकर ही व्यक्ति के जीवन में शुभता लाते हैं। यही नहीं जब शुभ कर्मो का उदय होता है तभी संतों का समागम मिलता है। देवताओं को भी रिद्धि-सिद्धि फल मंत्रो ंसे प्राप्त हुए व सांसारिक व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि के साथ जीवन पुण्यमय बनता है।
धरा पर है 7 करोड़ मंत्र
संतश्री ने कहा कि इस धरा पर 7 करोड़ मंत्र हैं। मंत्रों के विवेकपूर्ण शुद्ध-सात्विक मनन से दुनिया के हर प्रकार से दु:खों से मुक्ति संभव है। पावन मंत्रों को सुनकर शरीर में शक्तिपात होता ही है। संगीतमय भजनों की प्रस्तुतियों पर जोशीले अंदाज में तालियों की गूंज कराते हुए कहा कि हथेलियां 72 हजार नाडियों का उदगम स्थल होती है, हंसते-मुस्कुराते हुए भक्ति के दौरान तालियां शरीर के अनेक रोगों से मुक्ति दिलाती है। गुरुदेव ने कहा कि धर्म एकता सिखाता है, जीवन में समता के बगैर धर्म आ नहीं सकता अर्थात मन में निंदा के भाव एवं राग द्वेष रखकर धर्म फल कभी प्राप्त नहीं किया जा सकता।
लाभार्थियों का सम्मान
श्री नाकोड़ा भैरव भक्त मंडल अध्यक्ष एडवोकेट यश जैन ने बताया कि संगीतकार दीपक करणपुरिया की टीम ने भक्तिमयी प्रस्तुतियां दी। दिव्य महामांगलिक श्रवण करने सर्वसमाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस दौरान आयोजन में विभिन्न लाभार्थी परिवारों का सम्मान किया गया। इस मौके पर जयंतीलाल दख, आजादसिंह ढ्ढ्ढा, ज्ञानचंद चौपड़ा, राजेश कियावत, बाबूलाल तांतेड़, पवन पाटनी, प्रकाश मेहरा, केकेसिंह, सुरेंद्र शर्मा, चंद्रप्रकाश ओस्तवाल, धरमचंद चपड़ोद, ज बूकुमार गंगवाल, प्रदीप चौधरी, पिंकेश मेहरा, अंतिम लुक्कड़ आदि का दुपट्टा ओढ़ाकर स्वागत-सत्कार किया गया।
Published on:
23 Dec 2019 06:25 pm
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