
नीमच. शिक्षा विभाग ने दो वर्ष 2021-22 के सत्र में कक्षा 5वीं व 8वीं के परीक्षा पैटर्न में बदलाव करते हुए बोर्ड की तर्ज पर परीक्षाओं की शुरूआत की थी। इसके बाद सत्र 2022- 23 में भी दोनों परीक्षाएं बोर्ड पैटर्न से ली गई। तत्कालीन दौर में परीक्षाओं का शुल्क नहीं लिया। अब जबकि बच्चे से लेकर उनके पालक अंकसूची का इंतजार कर रहे हैं तो कहा जा रहा है कि परीक्षा का शुल्क देना होगा। 2022-23 में परीक्षा देकर आए बच्चों को अब तक उनकी अंकसूची नहीं दी है।
वर्ष 2022-23 की पांचवीं-आठवीं की परीक्षाएं मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल के अनुसार मार्च-अप्रैल में हुई थीं। स्कूल शिक्षा विभाग ने जुलाई में परिणाम घोषित किए थे। अंकसूची इंटरनेट से डाउनलोड भी की गई। नियम अनुसार इसी महीने बच्चों को अंकसूची मिलना थी, लेकिन विभाग ने वो जारी नहीं की। जिले में स्कूलों ने प्रोविजनल अंकसूची के आधार पर ही अगली कक्षा में बच्चों को प्रवेश दे दिया व 8वीं के बच्चों के 9वीं में नामांकन किए। इसी महीने स्कूल शिक्षा विभाग ने बिना नंबरों के प्रिंट की हुई मार्कशीट डीपीसी कार्यालय भेज दी थी। पहले तो आरएमएस के पोर्टल पर प्रिंट का ऑप्शन नहीं खुला और अब जब यह विकल्प खुला तो पता चला कि अब स्कूलों से 5वीं की मार्कशीट के लिए 50 और 8वीं की मार्कशीट के लिए 100 रुपए का शुल्क मांगा जा रहा है।
इसलिए देना होगा शुल्क
2021-22 में शिक्षा विभाग ने पांचवीं और आठवीं की परीक्षाओं को बोर्ड पैटर्न पर आयोजित किया था। परीक्षा पूरी तरह वैसी ही ली गई थी, जैसी बोर्ड की होती है। परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। बच्चों के पेपर बाहर बोर्ड के अनुसार तैयार करवाए गए थे। इसके बाद भी बच्चों को मार्कशीट नहीं दी गई। जब नए सत्र में एडमिशन की बारी आई तो स्कूलों ने ऑनलाइन डाउनलोड कर प्रोविजनल मार्कशीट पर सील लगाकर साइन करके दी, जिससे बच्चों का एडमिशन हो पाया। हालांकि मूल मार्कशीट अब तक नहीं मिली है। इसके लिए भी स्कूलों को शुल्क देना होगा।
Published on:
10 Dec 2023 06:50 pm
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