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Acharyashri Kulbodi Surishwar Maharaj- हमारा सर्वस्व माता-पिता के चरणों में न्यौछावर करना ही भारतीय संस्कृति

रतलाम। आज सारी दुनिया मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्रीराम के पीछे पागल है, क्योकि प्रभु का आचरण सुंदर है। दुनिया इंतजार कर रही है कि अयोध्या में कब रामलला विराजित होंगे। राम को एक नजरिए से मत देखों। राम एक है, लेकिन स्वरूप अनेक है। राम सफल पुत्र, सफल भाई, सफल पति, सफल मित्र और सफल शत्रु रहे। राम वो ही पूर्ण विराम, अब इससे आगे चरम सीमा और कोई नहीं है।

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यह विचार आचार्यश्री कुलबोधि सूरीश्वर महाराज ने धानमंडी में आयोजित दो दिवसीय विशेष प्रवचन श्रेणी में पहले दिन व्यक्त किए। उन्होने कहा कि श्रीराम को जब वनवास हुआ, तब उन्होने पिता से कोई सवाल नहीं किया। क्योंकि जहां समर्पण होता है, वहां सिर्फ स्वीकार होता है। पिता के वचन खातिर राज सिंहासन छोड़ने वाले राम कहां और आजकल अपनी पत्नी खातिर सगे मां-बाप को छोड़ने वाले रावण कहां। हमारा सर्वस्व माता-पिता के चरणों में न्यौछावर करना भारतीय संस्कृति थी। इसमें कहीं वृद्धाश्रम नहीं था। आज हम घर में पशु-पक्षियों को पालते है, लेकिन मां-बाप को निकाल देते है।

घरों में संवाद होना चाहिए विवाद नहीं


आचार्यश्री ने कहा कि आज हमें कहां बैठना इसका विवेक है लेकिन किसके पास बैठना यह पता नहीं है। आप किसके साथ बैठते हो वह महत्व की बात है। आज हमारे घर में संवाद कम और विवाद ज्यादा है। हमारे घर में संवाद की भूमिका होना चाहिए, विवाद की नहीं। हम मंदिर एवं धर्म स्थान में जाते है, तब राम की भूमिका में होते है, लेकिन बाहर आते ही रावण हो जाते है। हमें श्रीराम ने जो किया, वह करना है और श्रीकृष्ण ने जो कहा है, वह करना है। उनका उपदेश और जीवन हमारे लिए अविस्मरणीय रहेगा। प्रभु ने बखूबी से अपना जीवन जिया है।

सफल पुत्र बनना आसान, लेकिन भाई बनना मुश्किल


आचार्य श्री ने कहा कि आज हम एक-दूसरे का मोबाइल चेक करते है, क्योंकि भरोसा नहीं है लेकिन राम-सीता को एक-दूसरे पर अटूट विश्वास था। हजारों सदियां बीत गई लेकिन आज भी रामचंद्र सबके दिलो में है। आप स्वयं से पूछे हम राम की ओर चल रहे हैं या रावण की ओर। सफल पुत्र बनना आसान है, सफल भाई बनना मुश्किल है। रावण की मृत्यु पर भी राम रोए थे, क्योकि उसके जैसा तत्व ज्ञानी कोई नहीं था। जीवन में यदि शत्रु भी मिले, तो श्री राम जैसा चाहिए जो हमें मारने का काम न करें, हमें जिंदा रखने का काम करें। आचार्यश्री के श्री मुख से धानमंडी क्षेत्र में महासत्संग के दूसरे दिन 'ऐसो जनम बार बारÓ विषय पर प्रवचन होंगे। इसके लाभार्थी मोहनबाई सौभागमल तलेरा परिवार रहेगा।